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Keshav Ram Singhal

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Wednesday, March 11, 2026

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS), इसके लाभ और ISO 14001

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS), इसके लाभ और ISO 14001

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) क्या है?


प्रबंध प्रणाली (Management System) वह संरचित तरीका है जिसके माध्यम से कोई भी संगठन अपने उद्देश्यों, प्रक्रियाओं और गतिविधियों की योजना बनाता है तथा उनका प्रबंधन करता है। पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System – EMS) संगठन की प्रबंध प्रणाली का वह भाग है जो पर्यावरणीय पहलुओं और प्रभावों के प्रबंधन से संबंधित होता है।


दूसरे शब्दों में, EMS एक ऐसा ढाँचा प्रदान करता है जिसके माध्यम से संगठन —


* अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का प्रबंधन कर सकता है,

* पर्यावरण से जुड़े जोखिमों और अवसरों को पहचान और संबोधित कर सकता है, तथा 

* सतत विकास (Sustainability) को बढ़ावा दे सकता है।


EMS का उद्देश्य संगठन के संचालन के प्रत्येक स्तर पर पर्यावरणीय सततता (Environmental Sustainability) के सिद्धांतों को योजनाबद्ध और रणनीतिक रूप से शामिल करना है।


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली लागू करने के लाभ


EMS लागू करने के बाद कोई भी संगठन —


• यह पहचान सकता है कि उसकी गतिविधियाँ पर्यावरण पर किस प्रकार प्रभाव डालती हैं,

• पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए मापनीय लक्ष्य निर्धारित कर सकता है,

• इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त प्रक्रियाएँ और नियंत्रण उपाय लागू कर सकता है,

• पर्यावरणीय प्रदर्शन की नियमित निगरानी (Monitoring) कर सकता है, और 

• अंततः निरंतर सुधार (Continual Improvement) के माध्यम से अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है।


ISO 14001 क्या है?


ISO 14001 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System – EMS) के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जिसे International Organization for Standardization (ISO) द्वारा विकसित किया गया है। यह मानक संगठनों को उनके कार्यों, उत्पादों और सेवाओं से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने, नियंत्रित करने और निरंतर सुधार करने के लिए एक व्यवस्थित ढाँचा प्रदान करता है। आज विश्व के 170 से अधिक देशों में 3,00,000 से अधिक संगठन इस मानक पर भरोसा करते हैं और इसे अपने संगठनों में लागू कर रहे हैं।


ISO 14001 संगठनों को एक व्यावहारिक (Practical) और लचीला (Flexible) फ्रेमवर्क प्रदान करता है, जिसके माध्यम से वे —


* अपने पर्यावरणीय प्रभावों को पहचान और प्रबंध कर सकते हैं,

* कानूनी एवं नियामकीय अनुपालन (Compliance) को बेहतर बना सकते हैं,

* संसाधनों के उपयोग की दक्षता बढ़ा सकते हैं,

* लागत को अनुकूल बना सकते हैं, तथा 

* संगठन की साख और विश्वसनीयता को मजबूत कर सकते हैं।


वर्तमान में लागू ISO 14001:2015 मानक संशोधन प्रक्रिया में है। जनवरी 2026 में इसका Final Draft International Standard (FDIS) जारी किया जा चुका है और संभावना है कि मार्च–अप्रैल 2026 के आसपास इसका संशोधित संस्करण ISO 14001:2026 के रूप में प्रकाशित होगा।


नया संस्करण संगठनों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी को अधिक प्रभावी ढंग से अपनाने में सहायता करेगा, चाहे संगठन का आकार या क्षेत्र कुछ भी क्यों न हो। इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि जिन संगठनों को पर्यावरणीय प्रबंध का पूर्व अनुभव नहीं है, वे भी इसे अपेक्षाकृत सरलता से समझ और लागू कर सकें।


सार 


आज के समय में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास वैश्विक प्राथमिकता बन चुके हैं। ऐसे में ISO 14001 संगठनों को यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि उनकी गतिविधियाँ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और टिकाऊ हों।


यह मानक केवल पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनों को दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता और सामाजिक विश्वास प्राप्त करने में भी सहायक सिद्ध होता है। मार्च–अप्रैल 2026 के आसपास पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली का संशोधित संस्करण ISO 14001:2026 के रूप में प्रकाशित होगा।


सादर,

केशव राम सिंघल


ISO/FDIS 14001:2026 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली मानक में प्रमुख परिवर्तन

 ISO/FDIS 14001:2026 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली मानक में प्रमुख परिवर्तन

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 


ISO/FDIS 14001:2026 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System – EMS) का अंतिम ड्राफ्ट मानक जनवरी 2026 में जारी हो चुका है, लेकिन अभी इसे अंतिम मानक (Final Standard) के रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है। अनुमान है कि मार्च–अप्रैल 2026 के आसपास इसका अंतिम संस्करण प्रकाशित होगा, जो ISO 14001:2015 को प्रतिस्थापित करेगा।


ISO/FDIS 14001:2026 में प्रमुख Clause-wise परिवर्तन संक्षेप में निम्नलिखित हैं —


Clause 4 – संगठन का संदर्भ (Context of the Organization)


इस क्लॉज़ में मुख्य परिवर्तन के रूप में संगठन के पर्यावरणीय संदर्भ का दायरा विस्तृत किया गया है। अब संगठन को केवल जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ही नहीं, बल्कि जैव विविधता, प्रदूषण स्तर तथा प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता (Biodiversity, Pollution Levels, Natural Resources Availability) जैसे पर्यावरणीय कारकों पर भी विचार करना होगा।


इसका अर्थ यह है कि पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली लागू करते समय संगठन को व्यापक पर्यावरणीय परिस्थितियों का विश्लेषण करना आवश्यक होगा। नए संस्करण में जलवायु परिवर्तन को EMS के संदर्भ में अधिक स्पष्ट रूप से शामिल करने पर विशेष बल दिया गया है।


Clause 5 – नेतृत्व (Leadership)


इस क्लॉज़ में पर्यावरणीय प्रदर्शन के प्रति शीर्ष नेतृत्व (Top Management) की जवाबदेही को और अधिक स्पष्ट किया गया है। पर्यावरणीय प्रशासन (Environmental Governance) और जवाबदेही (Accountability) पर विशेष जोर दिया गया है। अर्थात् अब नेतृत्व की भूमिका केवल पर्यावरणीय नीति घोषित करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पर्यावरणीय प्रदर्शन के परिणामों के प्रति भी उनकी जिम्मेदारी अधिक स्पष्ट होगी।


Clause 6 – आयोजना (Planning)


यह क्लॉज़ इस संशोधन में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों वाला भाग माना जा रहा है।


Clause 6.1 – जोखिम और अवसर (Risks and Opportunities)


इस उप-क्लॉज़ में जोखिम और अवसरों की पहचान तथा उनसे संबंधित कार्रवाइयों की अपेक्षाओं को पुनर्संरचित (Restructured) किया गया है। जोखिम और अवसरों की पहचान तथा उनके प्रबंधन के लिए कार्ययोजनाओं को अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है।


Clause 6.1.2 – पर्यावरणीय पहलू (Environmental Aspects)


इस भाग में जीवन-चक्र परिप्रेक्ष्य (Life-cycle Perspective) को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। अब उत्पाद या सेवा के पूरे जीवन-चक्र — डिज़ाइन से लेकर निपटान (Disposal) तक — के पर्यावरणीय प्रभावों पर अधिक ध्यान देने की अपेक्षा की गई है।


Clause 6.3 – परिवर्तनों की योजना बनाना और उनका प्रबंधन करना (Planning and Managing Changes)


यह इस मानक में जोड़ा गया एक नया क्लॉज़ है। इसके अंतर्गत EMS में होने वाले परिवर्तनों — जैसे प्रक्रिया, तकनीक, संगठनात्मक संरचना या विनियम (Process, Technology, Organization, Regulation) — को योजनाबद्ध तरीके से प्रबंधित और नियंत्रित करने की अपेक्षा की गई है।


Clause 7 – समर्थन (Support)


इस क्लॉज़ में क्षमता (Competence), जागरूकता (Awareness) और संचार (Communication) से संबंधित अपेक्षाओं को अधिक स्पष्ट किया गया है। साथ ही मार्गदर्शन सामग्री (Guidance Text) को भी अधिक विस्तृत बनाया गया है।


Clause 8 – संचालन (Operation)


इस क्लॉज़ में “Outsourced Processes” शब्दावली के स्थान पर “Externally Provided Processes, Products and Services” शब्दावली का प्रयोग किया गया है। इसका अर्थ यह है कि अब संगठन को अपने सप्लायर तथा वैल्यू-चेन (Value Chain) पर अधिक प्रभावी नियंत्रण या प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।


Clause 9 – प्रदर्शन मूल्यांकन (Performance Evaluation)


इस क्लॉज़ में पर्यावरणीय प्रदर्शन की निगरानी और मूल्यांकन (Environmental Performance Monitoring and Evaluation) पर अधिक जोर दिया गया है। साथ ही हितधारकों की अपेक्षाओं (Stakeholder Expectations) तथा रिपोर्टिंग (Reporting) से संबंधित अपेक्षाओं को भी अधिक स्पष्ट किया गया है।


Clause 10 – सुधार (Improvement)


इस क्लॉज़ में केवल छोटे संपादकीय परिवर्तन तथा शब्दावली (Terminology) के अद्यतन किए गए हैं।


प्रमुख परिवर्तन – संक्षेप में


- जलवायु परिवर्तन के साथ व्यापक पर्यावरणीय परिस्थितियों (Environmental Conditions) का समावेश

- नेतृत्व की जवाबदेही (Leadership Accountability) पर अधिक जोर

- जोखिम एवं अवसर प्रक्रिया (Risk and Opportunity Process) का पुनर्संरचना

- जीवन-चक्र सोच (Life-cycle Thinking) को सुदृढ़ करना

- परिवर्तन प्रबंधन (Change Management) के लिए नया क्लॉज़

- आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) तथा बाहरी रूप से प्रदान की जाने वाली प्रक्रियाओं, उत्पादों और सेवाओं पर अधिक ध्यान


निष्कर्ष


संक्षेप में कहा जा सकता है कि ISO/FDIS 14001:2026 कोई नया ढांचा प्रस्तुत नहीं करता, बल्कि मौजूदा पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) को अधिक स्पष्ट, व्यापक और पर्यावरणीय दृष्टि से मजबूत बनाने का प्रयास करता है।


यह ध्यान देने योग्य है कि यह मानक का Final Draft International Standard (FDIS) है। अंतिम प्रकाशन के समय इसमें कुछ छोटे-मोटे संपादकीय परिवर्तन संभव हैं। यह आलेख विभिन्न उपलब्ध स्रोतों से संकलित जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।


सादर

केशव राम सिंघल