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Keshav Ram Singhal

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मंगलवार, 16 जून 2026

संगठन और उसके प्रसंग को समझना (Understanding the organization and its context)

संगठन और उसके प्रसंग को समझना (Understanding the organization and its context) 

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ISO 14001:2026 EMS मानक खंड 4.1 की अपेक्षाओं के अनुसार, संगठन को उन सभी आंतरिक (Internal) और बाह्य (External) मुद्दों का निर्धारण करना आवश्यक है, जो उसके उद्देश्य (Purpose) के लिए प्रासंगिक हैं और उसकी पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के अपेक्षित परिणामों को प्राप्त करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।


इन मुद्दों में वे पर्यावरणीय परिस्थितियाँ (Environmental Conditions) भी शामिल होती हैं, जो संगठन को प्रभावित करती हैं या संगठन द्वारा प्रभावित हो सकती हैं, जैसे प्रदूषण का स्तर, प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता (Biodiversity) तथा पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य (Ecosystem Health)। इस अपेक्षा का उद्देश्य संगठन को उन प्रमुख मुद्दों की समग्र समझ प्रदान करना है, जो उसके संचालन (Operations) को प्रभावित करते हैं, उसकी पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रबंधन को प्रभावित करते हैं, तथा EMS के अपेक्षित परिणामों पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।


आंतरिक और बाह्य मुद्दों के कुछ उदाहरण


(A) पर्यावरणीय परिस्थितियाँ


* वायु और जल की गुणवत्ता (Air and Water Quality)

* भूमि उपयोग (Land Use)

* मौजूदा प्रदूषण स्तर 

* प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता

* जैव विविधता की स्थिति

* पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य


उदाहरण - यदि कोई उद्योग जल-आधारित उत्पादन करता है, तो स्थानीय जल की उपलब्धता और गुणवत्ता उसके लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगी।


(B) बाह्य मुद्दे (External Issues)


* सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियाँ

* राजनीतिक और कानूनी ढाँचा

* नियामक (Regulatory) अपेक्षाएँ

* आर्थिक और तकनीकी विकास

* प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण


उदाहरण - सरकार द्वारा लागू नई पर्यावरणीय नियमावली या कानून संगठन की अनुपालन रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।


(C) आंतरिक मुद्दे (Internal Issues)


* संगठन की गतिविधियाँ, उत्पाद और सेवाएँ (Organization's activities, products and services)

* पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental Performance)

* रणनीतिक दिशा (Strategic Direction)

* संगठनात्मक संस्कृति (Organizational Culture)

* क्षमताएँ (Knowledge, Processes, Systems)


उदाहरण - यदि संगठन में पर्यावरणीय जागरूकता कम है, तो EMS का कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में जागरूकता बढ़ाने के लिए उचित कदम उठाना आवश्यक है।


पर्यावरणीय परिस्थितियों की प्रकृति


यहॉं ध्यान देने की बात है कि पर्यावरणीय परिस्थितियाँ स्थानीय, क्षेत्रीय या वैश्विक (Local, Regional or Global) हो सकती हैं, अचानक (Sudden) या धीरे-धीरे (Gradual) बदल सकती हैं, तथा एक-दूसरे से परस्पर जुड़ी होती हैं।


उदाहरण - जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जल संसाधनों, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ प्रभावित करता है। इसलिए, इन परस्पर संबंधों (Interrelationships) को समझना प्रभावी पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।


पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और उसका महत्व


पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) जीवित और निर्जीव तत्वों का एक परस्पर जुड़ा हुआ तंत्र है, जिसमें शामिल होते हैं पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव (Microorganisms), जल, मिट्टी और वायु। उदाहरण - जंगल, झील, मैंग्रोव, घास के मैदान, रेगिस्तान आदि।


पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य (Ecosystem Health) का अर्थ है पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना (Structure), कार्य क्षमता (Functionality) और लचीलापन (Resilience) बनाए रखने की क्षमता। संगठन पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर निर्भर भी होते हैं, और अपनी गतिविधियों से उन्हें प्रभावित भी करते हैं।


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के साथ संबंध


संगठन के प्रसंग की समझ का उपयोग पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) को स्थापित (Establish) करने, कार्यान्वित (Implement) करने, बनाए रखने (Maintain) तथा निरंतर सुधार (Continual Improve) करने में किया जाता है।


ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 4.1 के अनुसार पहचाने गए मुद्दे संगठन के लिए जोखिम (Risks) और अवसर (Opportunities) उत्पन्न करते हैं, जिन्हें संगठन को आयोजना (Clause 6), सहयोग व संचालन (Clause 7, 8) तथा निष्पादन मूल्यांकन (Clause 9) के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना होता है।


संबंधित मानकों का संदर्भ (मार्गदर्शन हेतु)


पर्यावरणीय परिस्थितियों को बेहतर समझ के लिए निम्न मानकों को संदर्भ रूप में मार्गदर्शन के लिए देखा जा सकता है, पर यह ISO 14001:2026 EMS मानक की अपेक्षा (Requirement) नहीं है -


* ISO 14002-1:2019 — Environmental management systems — Guidelines for using ISO 14001 to address environmental aspects and conditions within an environmental topic area — Part 1: General

* ISO 14055-1:2017 — Environmental management — Guidelines for establishing good practices for combating land degradation and desertification — Part 1: Good practices framework 

* ISO 14080:2018 — Greenhouse gas management and related activities — Framework and principles for methodologies on climate actions  

* ISO 14090:2019 — Adaptation to climate change — Principles, requirements and guidelines  

* ISO 14091:2021 — Adaptation to climate change — Guidelines on vulnerability, impacts and risk assessment  

* ISO 17298:2025 — Biodiversity — Considering biodiversity in the strategy and operations of organizations — Requirements and guidelines 

* ISO 59014:2024 — Circular economy — Sustainability and traceability of secondary materials — Requirements and guidance 


मानकों की यह सूची देते समय ध्यान रखा गया है कि नवीनतम मानक ही लिखा जाए, फिर भी कोई गलती हो जाने या भविष्य में किसी मानक के संशोधित होने पर नवीनतम मानक ही सन्दर्भ के लिए देखा जाना चाहिए। 


मुख्य बिंदु (Quick Takeaways)


* अनिवार्य अपेक्षा - आंतरिक और बाह्य मुद्दों का निर्धारण (Clause 4.1) EMS प्रणाली की सफलता के लिए अनिवार्य है।

* परस्पर जुड़ाव - जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य स्थानीय और वैश्विक स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हैं।

* मार्गदर्शन (गैर-अनिवार्य) - ISO 14002, 17298 और 59014 जैसे मानक प्रसंग को समझने में सहायक हैं, लेकिन ऑडिट के लिए अनिवार्य आवश्यकता नहीं हैं।


सार


संगठन और उसके प्रसंग को समझना ISO 14001:2026 EMS मानक का एक मूलभूत आधार है। यदि संगठन अपने आंतरिक और बाह्य मुद्दों तथा पर्यावरणीय परिस्थितियों को सही तरीके से समझता है, तो वह बेहतर निर्णय ले सकता है, जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन कर सकता है, तथा अपने पर्यावरणीय निष्पादन में निरंतर सुधार कर सकता है।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)

सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)

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किसी भी प्रबंध प्रणाली के कार्यान्वयन में अक्सर तीन प्रकार की कार्रवाइयों—सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)—का सामना होता है। ये तीनों पद कई बार भ्रम उत्पन्न करते हैं। सुधार (Correction) से समस्या ठीक होती है, सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) से समस्या का कारण समाप्त किया जाता है और निवारक कार्रवाई (Preventive Action) के माध्यम से समस्या उत्पन्न होने से पहले ही उसके संभावित कारण को दूर कर दिया जाता है।


सुधार (Correction) = समस्या को तुरंत ठीक करना।

सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) = समस्या के मूल कारण को खोजकर उसे समाप्त करना ताकि वही समस्या दोबारा न हो।

निवारक कार्रवाई (Preventive Action) = समस्या उत्पन्न होने से पहले उसके संभावित कारण को समाप्त करना।


उदाहरण के तौर पर इसे इस प्रकार समझा जा सकता है। मैंने देखा कि मेरे घर की छत से बारिश का पानी टपक रहा है। समस्या देखकर मैंने बाल्टी रखकर पानी को फर्श पर फैलने से रोक दिया और टपकने वाली जगह पर अस्थायी सीलेंट लगा दिया। यह सुधार (Correction) है, क्योंकि मैंने तत्काल समस्या को संभाल लिया, लेकिन पानी टपकने का मूल कारण अभी भी समाप्त नहीं हुआ।


इसके बाद मैंने समस्या के मूल कारण को खोजने का प्रयास किया और पाया कि घर की छत की वॉटरप्रूफिंग खराब हो गई है। यह समस्या दोबारा न हो, इसके लिए मैंने पूरी छत की मरम्मत करवाई और नई वॉटरप्रूफिंग करवाई। यह सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) है, क्योंकि मैंने पानी टपकने के मूल कारण को समाप्त कर दिया।


पिछले वर्ष बारिश के दिनों में मैंने अपने पड़ोसी के घर की छत से पानी टपकने की समस्या देखी थी। यद्यपि उस समय मेरे घर में ऐसी कोई समस्या नहीं हुई थी, फिर भी इस बार वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले मैंने अपनी छत का निरीक्षण करवाया। निरीक्षण में पता चला कि मेरी छत की वॉटरप्रूफिंग भी पुरानी हो चुकी है। इसलिए मैंने वर्षा ऋतु आने से पहले ही उसकी वॉटरप्रूफिंग करवा ली। यह निवारक कार्रवाई (Preventive Action) है, क्योंकि मैंने संभावित समस्या को उत्पन्न होने से पहले ही रोक दिया।


एक अन्य सरल उदाहरण से भी इन अवधारणाओं को समझा जा सकता है। मैं अपने स्कूटर से बाजार जा रहा था कि रास्ते में मेरे स्कूटर का टायर पंचर हो गया। मैंने पंचर ठीक करवा लिया। यह सुधार (Correction) है।


जब पंचर की मरम्मत करवाई जा रही थी, तब मैंने देखा कि ट्यूब में बड़ा पंचर है और पहले भी उसमें कई बार पंचर हो चुके हैं। स्थायी समाधान के लिए मैंने नई ट्यूब लगवा ली। यह सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) है।


बाद में जब मेरा स्कूटर नियमित सर्विसिंग के लिए गया, तब मैंने टायर और ट्यूब की स्थिति की जाँच करवाई। उनके अधिक पुराने और घिसे हुए होने के कारण मैंने उन्हें पहले ही बदलवा दिया, ताकि पंचर जैसी समस्या उत्पन्न न हो। यह निवारक कार्रवाई (Preventive Action) है।


ये तीनों पद वास्तव में तीन महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं, जो हमारे दैनिक जीवन में भी लागू होती हैं और विभिन्न प्रबंध प्रणालियों, जैसे ISO 9001 तथा ISO 14001, के कार्यान्वयन में भी व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।


सुधार (Correction) → समस्या ठीक करो।

सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) → समस्या के कारण को समाप्त करो।

निवारक कार्रवाई (Preventive Action) → समस्या आने से पहले उसके कारण को समाप्त करो।


यदि कोई संगठन इन तीनों अवधारणाओं का नियमित रूप से उपयोग करता है, तो उसकी प्रबंध प्रणाली निश्चित रूप से अधिक प्रभावी और मजबूत बनती है। हालाँकि वर्तमान प्रबंध प्रणाली मानकों में 'निवारक कार्रवाई' (Preventive Action) शब्द का प्रत्यक्ष उपयोग पहले की भाँति नहीं किया जाता है, फिर भी इसकी मूल अवधारणा आज भी विद्यमान है। अब संभावित जोखिमों और अवसरों की पहचान तथा उन्हें संबोधित करने की अपेक्षा के माध्यम से निवारक कार्रवाई की भावना को प्रबंध प्रणालियों में समाहित किया गया है।


एक मजबूत प्रबंध प्रणाली केवल समस्याओं को ठीक नहीं करती, बल्कि उनके कारणों को समाप्त करती है और संभावित समस्याओं को उत्पन्न होने से पहले ही रोकने का प्रयास करती है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


सोमवार, 15 जून 2026

ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड (Clauses) – संक्षेप में

ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड (Clauses) – संक्षेप में

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ISO 14001:2026 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जो संगठनों को उनके पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार हेतु एक व्यवस्थित ढाँचा प्रदान करता है। इसकी अपेक्षाएँ (Requirements) सामान्य (Generic) हैं और किसी भी प्रकार, आकार, उत्पाद या सेवा वाले संगठन पर लागू की जा सकती हैं।


खंड 1 – कार्यक्षेत्र (Scope)


इस खंड में मानक के उद्देश्य और उसके लागू होने की सीमा (Scope) का वर्णन किया गया है।


खंड 2 – मानक सन्दर्भ (Normative References)


इस खंड में कोई विशिष्ट संदर्भ मानक नहीं दिया गया है। हालाँकि, समझ के लिए ISO 9000 तथा ISO 14000 जैसे मानकों को संदर्भ रूप में देखा जा सकता है।


खंड 3 – शब्दावली और परिभाषाएँ (Terms and Definitions)


इस खंड में मानक में प्रयुक्त महत्वपूर्ण पदों और उनकी परिभाषाओं का वर्णन किया गया है।


खंड 4 से 10 – EMS की अपेक्षाएँ (Requirements of EMS)


खंड 4 – संगठन का प्रसंग (Context of the Organization) 


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ -

* संगठन और उसके प्रसंग की समझ (Understanding the organization and its context)

* इच्छुक पक्ष (Interested Parties) 

* EMS का कार्यक्षेत्र (Scope)

* EMS की स्थापना 


खंड 5 – नेतृत्व (Leadership) 


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* शीर्ष प्रबंधन की भूमिका और प्रतिबद्धता (Role and commitment of top management)

* पर्यावरणीय नीति की स्थापना (Establishing environmental policy)

* भूमिकाएँ, जिम्मेदारियाँ और प्राधिकार (Roles, responsibilities and authorities) 


खंड 6 – आयोजना (Planning)

 

निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* सामान्य (General)

* पर्यावरणीय पहलूओं का निर्धारण (Determining environmental aspects)

* अनुपालन दायित्व (Compliance obligations) 

* जोखिम और अवसरों का निर्धारण और सम्बोधन (Determining and addressing risks and opportunities) 

* आयोजना कार्रवाई (Planning action)

* पर्यावरणीय उद्देश्य (Environmental objectives)

* परिवर्तन की योजना (Planning of Changes)


खंड 7 – समर्थन (Support)


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* संसाधन (Resources)

* दक्षता (Competence)

* जागरूकता (Awareness)

* संप्रेषण (Communication)

* प्रलेखित जानकारी (Documented Information) 


खंड 8 – संचालन (Operation)


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* संचालन आयोजना और नियंत्रण (Operational planning and control)

* आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया (Emergency preparedness and response)


खंड 9 – प्रदर्शन मूल्यांकन (Performance Evaluation)


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* निगरानी, मापन, विश्लेषण और मूल्यांकन (Monitoring, measurement, analysis and evaluation)

* अनुपालन का मूल्यांकन (Compliance evaluation)

* आंतरिक संपरीक्षण (Internal Audit)

* प्रबंधन समीक्षा (Management Review)


खंड 10 – सुधार (Improvement)


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* निरंतर सुधार (Continual Improvement)

* अपालना (Nonconformity) और सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective action) 

 

अनुलग्नक A (Annex A – Informative)


इस भाग में ISO 14001 मानक के उपयोग और कार्यान्वयन हेतु मार्गदर्शन (Guidance) प्रदान किया गया है।


ग्रंथसूची (Bibliography)


मानक के अंत में संबंधित संदर्भ सामग्री की सूची दी गई है। 


PDCA Mapping (ISO 14001 EMS) 


ISO 14001;2026 EMS मानक के विभिन्न खंडों (Clauses) को PDCA (Plan-Do-Check-Act) चक्र के साथ निम्न प्रकार मैप किया जा सकता है - 


Plan (आयोजना) चरण - सम्बंधित खंड 4, 5, 6 - प्रमुख फोकस - संगठन का प्रसंग, नेतृत्व, जोखिम और अवसर, उद्देश्य निर्धारण

Do (कार्यान्वयन) चरण - सम्बंधित खंड 7, 8 - प्रमुख फोकस - संसाधन, दक्षता, संप्रेषण, संचालन नियंत्रण

Check (जाँच) चरण - सम्बंधित खंड 9 - प्रमुख फोकस - निगरानी, मापन, आंतरिक ऑडिट, प्रबंधन समीक्षा

Act (सुधार) चरण - सम्बंधित खंड 10 - प्रमुख फोकस - सुधारात्मक कार्रवाई, निरंतर सुधार













यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि खंड 5 (नेतृत्व/Leadership) को हालांकि 'Plan' चरण के साथ समझा जाता है, लेकिन ISO के आधुनिक ढांचे के अनुसार, नेतृत्व पूरे PDCA चक्र के केंद्र (Center) में होता है जो बाकी चारों चरणों को गति और दिशा देता है। इस पूरे चक्र का केंद्रीय लक्ष्य और अंतिम उद्देश्य 'निरंतर सुधार' (Continual Improvement) को हासिल करना है। यह मैपिंग दर्शाती है कि ISO 14001 मानक एक व्यवस्थित और निरंतर सुधार आधारित प्रबंधन प्रणाली प्रदान करता है।


सार 


ISO 14001 EMS मानक का ढाँचा Plan-Do-Check-Act (PDCA) अवधारणा पर आधारित है, जो संगठन को एक व्यवस्थित, चरणबद्ध और प्रभावी तरीके से पर्यावरणीय प्रबंधन लागू करने में सहायता करता है। खंड 4 से 10 तक की अपेक्षाएँ मिलकर एक ऐसा प्रबंधन तंत्र बनाती हैं, जो न केवल अनुपालन सुनिश्चित करता है, बल्कि निरंतर सुधार और सतत विकास (Sustainable Development) को भी प्रोत्साहित करता है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


रविवार, 14 जून 2026

ISO 14001:2026 EMS मानक का कार्यक्षेत्र (Scope) - एक सरल समझ

 ISO 14001:2026 EMS मानक का कार्यक्षेत्र (Scope) - एक सरल समझ 

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सबसे पहले हमें जानना चाहिए कि कार्यक्षेत्र (Scope) का अर्थ क्या होता है? अंग्रेजी में इसे कहा जा सकता है - Scope refers to the boundaries, applicability, and extent of a management system or standard. Scope का हिंदी अर्थ है — “कार्यक्षेत्र” या “परिसीमा”, अर्थात यह बताता है कि कोई मानक या प्रबंध प्रणाली किन गतिविधियों, प्रक्रियाओं, उत्पादों, सेवाओं या स्थानों पर लागू होती है।पाठक कृपया ध्यान रखे कि इस आलेख में हम मानक की सीमाओं की बात कर रहे हैं, न कि पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के कार्यक्षेत्र (Scope) की।


सरल भाषा में इसे यूँ समझें - मानक का कार्यक्षेत्र (Scope) यह स्पष्ट करता है -


* मानक में क्या शामिल है (What is included)

* मानक में क्या शामिल नहीं है (What is excluded)

* मानक कहाँ लागू होता है (Where it applies)

* मानक किस पर लागू होता है (To whom it applies)


प्रबंध प्रणाली मानकों में कार्यक्षेत्र (Scope) का महत्व


हर ISO मानक (जैसे ISO 9001, ISO 14001) की शुरुआत में एक कार्यक्षेत्र (Scope) खंड 1 (Clause 1) होता है। इसके उद्देश्य निम्न होते हैं - 


* मानक की लागू होने की सीमा स्पष्ट करना

* उपयोगकर्ताओं को यह बताना कि यह मानक किस उद्देश्य के लिए है


उदाहरण के रूप में हम ISO 14001:2026 EMS मानक के कार्यक्षेत्र (Scope) की बात करें तो यह बताता है कि ISO 14001:2026 EMS मानक संगठन के पर्यावरणीय पहलुओं (Environmental Aspects) और प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन उपयोग, अनुपालन आदि पर लागू होता है। मानक का कार्यक्षेत्र यह नहीं बताता कि विशिष्ट प्रदूषण स्तर क्या हैं। इसकी जानकारी प्रशासनिक नियमों या कानून में होती है। 


कार्यक्षेत्र (Scope) प्रबंध प्रणाली का एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो यह स्पष्ट करता है कि यह प्रणाली कहाँ, किस पर और किस सीमा तक लागू होती है। सही कार्यक्षेत्र निर्धारित करना किसी भी प्रबंध प्रणाली मानक के प्रभावी कार्यान्वयन की पहली और महत्वपूर्ण शर्त होती है।


ISO 14001:2026 EMS मानक के कार्यक्षेत्र की बात करते हैं। ISO 14001 EMS मानक पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के लिए अपेक्षाओं (Requirements) को बताता है, जिसका इस्तेमाल कोई संगठन अपनी पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental performance) को बेहतर बनाने के लिए कर सकता है। यह मानक ऐसे संगठन के इस्तेमाल के लिए है, जो अपनी पर्यावरणीय ज़िम्मेदारियों को व्यवस्थित तरीके से प्रबंध करना चाहता है, और जो सतत विकास (Sustainable development) के पर्यावरणीय स्तम्भ (Environmental pillar) में योगदान देता है।


ISO 14001:2026 EMS मानक संगठन को अपने पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के अभिप्रेत परिणाम (intended outcomes) को पाने में मदद करता है, जो पर्यावरण, खुद संगठन और इच्छुक पक्षों के लिए मूल्य प्रदान करते हैं। किसी पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली के अभिप्रेत परिणामों में निम्न शामिल होते हैं -

- पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental performance) को बेहतर बनाना;

- अनुपालन (Compliance) की ज़िम्मेदारियों को पूरा करना;

- पर्यावरणीय लक्ष्यों (Environmental objectives) को हासिल करना।


ISO 14001:2026 EMS मानक किसी भी संगठन पर लागू किया जा सकता है, चाहे उसका आकार, प्रकार और प्रकृति कुछ भी हो, और यह उसकी गतिविधियों, उत्पादों और सेवाओं के पर्यावरणीय पहलुओं (Environmental aspects) पर लागू होता है, जिन्हें संगठन यह तय करता है कि वह जीवन चक्र (Life Cycle) सोच से नियंत्रित या प्रभावित कर सकता है। यहाँ यह ध्यान देने की बात है कि ISO 14001 EMS मानक विशिष्ट पर्यावरणीय निष्पादन मापदंड (Environmental performance criteria) नहीं बताता है।


ISO 14001:2026 EMS मानक का उपयोग किसी संगठन की पर्यावरण प्रबंध को व्यवस्थित तरीके से बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह या कुछ हिस्से में किया जा सकता है। हालाँकि, इस ISO 14001:2026 EMS मानक के हिसाब से अनुपालन होने के दावे तब तक ही मंज़ूर हैं, जब तक इसकी सभी अपेक्षाएँ संगठन के पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली में शामिल हों और बिना किसी छूट के पूरी की गई हों।


ISO 14001:2026 EMS मानक कार्यक्षेत्र (Scope ) की प्रमुख विशेषताएँ


* सभी प्रकार के संगठनों पर लागू (size, type, nature)

* पर्यावरणीय पहलुओं (Environmental aspects) पर आधारित

* जीवन चक्र परिपेक्ष्य (Life cycle perspective) को ध्यान में रखता है

* निष्पादन मापदंड (Performance criteria) निर्धारित नहीं करता


अतः कार्यक्षेत्र (Scope) प्रबंध प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है, जो यह स्पष्ट करता है कि प्रणाली कहाँ, किस पर और किस सीमा तक लागू होती है। उपयुक्त कार्यक्षेत्र का निर्धारण किसी भी प्रबंध प्रणाली के प्रभावी कार्यान्वयन की आधारशिला है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


ISO 14001:2026 EMS मानक - सामान्य जानकारी

ISO 14001:2026 EMS मानक - सामान्य जानकारी  

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ISO 14001:2026 EMS मानक, ISO द्वारा निर्धारित प्रबंध प्रणाली मानकों की समान संरचना (Harmonized Structure - HS) के आधार पर विकसित किया गया है। इन अपेक्षाओं में एक जैसी संरचना, एक जैसा मुख्य पाठ (core text), और मूल परिभाषा (core definitions) के साथ सामान्य पद (common terms) शामिल हैं, जिन्हें कई ISO प्रबंध प्रणाली मानकों (जैसे ISO 9001 QMS, ISO 45001 (OH&S), ISO 50001 (Energy Management), ISO 10012 (Measurement Management) जैसे मानकों को लागू करने वाले उपयोगकर्ताओं को लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। यहाँ यह बताना जरूरी है कि ISO ने अब आधिकारिक तौर पर 'High Level Structure (HLS)' शब्द को अपडेट करके 'Harmonized Structure (HS)' कर दिया है। 


ISO 14001:2026 EMS मानक में दूसरी प्रबंध प्रणालियों, जैसे क्वालिटी, ऑक्यूपेशनल हेल्थ और सेफ़्टी, एनर्जी या फ़ाइनेंशियल मैनेजमेंट के लिए खास अपेक्षाएँ शामिल नहीं हैं। हालाँकि, ISO 14001 EMS मानक एक संगठन को अपनी पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली को दूसरी प्रबंध प्रणाली की अपेक्षाओं के साथ जोड़ने के लिए एक सामान्य दृष्टिकोण और जोखिम-आधारित सोच का इस्तेमाल करने में मदद करता है।


ISO 14001:2026 EMS मानक में वे अपेक्षाएँ शामिल हैं जिनका इस्तेमाल इसके अनुपालन का पता लगाने के लिए किया जाता है। एक संगठन ISO 14001 EMS की अनुरूपता (conformity) निम्न तरीकों से प्रदर्शित कर सकता है - 


- आत्म-निर्णय (Self-determination) और स्व-घोषणा (Self-declaration) 

- रूचि रखने वाले पक्ष (Interested parties) द्वारा पुष्टि (जैसे ग्राहक)

- बाहरी व्यक्ति द्वारा सत्यापन (Second-party verification)

- प्रमाणन निकाय द्वारा प्रमाणन (Third-party certification) 


यहाँ यह ध्यान देने की बात है कि संगठन द्वारा पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली का प्रमाणन/पंजीकरण करवाना मानक की अपेक्षा नहीं है, यह संगठन का अपना निर्णय होता है। संगठन बिना प्रमाणन/पंजीकरण के भी ISO 14001:2026 EMS मानक को अपने संगठन में लागू कर सकता है। 


कई देशों में स्थानीय निकाय (Municipalities), पानी/ऊर्जा utilities, सरकारी विभाग आदि संगठन अक्सर ISO 14001 EMS मानक लागू करते हैं, परंतु third-party certification नहीं लेते। कारण वे इस प्रकार कार्यान्वयन लागत (cost) बचाते हैं, ISO 14001 EMS मानक कार्यान्वित करना उनका सार्वजनिक उत्तरदायित्व (public accountability) है और वे ऐसा आंतरिक पारदर्शिता के लिए करते हैं। ऐसे संगठनों में स्व-घोषणा (self-declaration) अधिक प्रचलित है। बहुत से माध्यम और छोटे संगठन (Small & Medium Enterprises - SMEs) ISO 14001 EMS मानक अपनाते हैं, आंतरिक संपरीक्षण (Internal audits) करते हैं, लेकिन प्रमाणन (certification) नहीं लेते। कारण - लागत सीमाएँ, ग्राहक द्वारा प्रमाणन (certification) की अनिवार्यता न होना और केवल आतंरिक सुधार पर ध्यान देना होता है। 


ISO 14001:2026 EMS मानक में कुल 10 खंड (Clauses) हैं। इनमें खंड 1 “कार्यक्षेत्र (Scope)”, खंड 2 “मानक संदर्भ (Normative References)” तथा खंड 3 “शब्दावली और परिभाषाएँ (Terms and Definitions)” को प्रस्तुत करते हैं। कार्यक्षेत्र (Scope) पर अलग से आलेख में विस्तार से चर्चा की गई है।

ISO 14001:2026 EMS मानक में कोई विशिष्ट मानक संदर्भ (Normative Reference) उल्लेखित नहीं किया गया है। खंड 3 में इस मानक से संबंधित कुल 32 पद एवं उनकी परिभाषाएँ दी गई हैं, जिनके माध्यम से पाठक इन तकनीकी शब्दों का अर्थ स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं। इन पदों की व्याख्या आवश्यकता अनुसार विभिन्न आलेखों में क्रमशः की जा सकती है।


खंड 4 से खंड 10 तक पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System - EMS) की अपेक्षाएँ (Requirements) दी गई हैं। यदि कोई संगठन ISO 14001:2026 EMS मानक को लागू करता है, तो इन सभी अपेक्षाओं का पालन करना आवश्यक होता है।


अनुलग्नक A, ISO 14001:2026 EMS मानक की अपेक्षाओं की गलत समझ को रोकने के लिए स्पष्टीकरण प्रदान करता है। यह खंड अपेक्षाओं की व्याख्या करता है। ISO 14001:2026 EMS मानक ढाँचे का विशिष्ट पर्यावरणीय विषयों पर मार्गदर्शन ISO 14002 सीरीज़ में दिया गया है। पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली पर कार्यान्वयन मार्गदर्शन ISO 14004 में शामिल है। अनुलग्नक A केवल मार्गदर्शन के लिए है और यह गैर-अनिवार्य (Informative/Non-mandatory) है।


अनुलग्नक A.3 ISO 14001:2026 EMS मानक में इस्तेमाल किए गए खास शब्दों और वाक्यांशों के बारे में और जानकारी देता है ताकि पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) से जुडी अवधारणा की समझ को बढ़ाया जा सके। 


ISO 14001:2026 EMS कार्यान्वयन के प्रमुख लाभ - 


- पर्यावरणीय प्रभावों की पहचान और नियंत्रण

- कानूनी एवं विनियामक अनुपालन में सहायता

- संसाधनों (जल, ऊर्जा) का कुशल उपयोग

- अपशिष्ट (waste) में कमी

- संगठन की साख (reputation) में वृद्धि


सार 


ISO 14001:2026 EMS मानक संगठनों को पर्यावरणीय उत्तरदायित्व निभाने, जोखिम-आधारित सोच अपनाने तथा सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में प्रभावी ढंग से कार्य करने हेतु एक सशक्त ढाँचा प्रदान करता है।

 

सादर,

केशव राम सिंघल 


रविवार, 31 मई 2026

ब्लॉग पाठकों के लिए एक आवश्यक सूचना - A Crucial Note for Blog Readers

ब्लॉग पाठकों के लिए एक आवश्यक सूचना 

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इस ब्लॉग के पाठक कृपया ध्यान दें कि यहाँ दिए गए आलेख, लेख और सामग्रियाँ केवल जागरूकता बढ़ाने और अकादमिक संदर्भ अध्ययन के उद्देश्य से साझा की गई हैं। इन्हें आधिकारिक पर्यावरणीय प्रबंधन प्रणाली (EMS) मानकों, जिसमें ISO 14001:2026 EMS मानक भी शामिल है, के विकल्प के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।


जो संगठन ISO 14001:2026 EMS को लागू कर रहे हैं, उनके पास इस मानक की एक आधिकारिक प्रति (Official Copy) होनी चाहिए। इसके संपूर्ण और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए तीन मुख्य मानकों का एक सेट रखने की सलाह दी जाती है -


- ISO 14000 (संशोधन प्रक्रिया के तहत नवीनतम अपडेट के साथ)

- ISO 14001:2026

- ISO 19011:2026


इसके अतिरिक्त, ISO 14000 परिवार के अन्य मानकों को प्राप्त करना संगठन के लिए एक विशिष्ट परिचालन लाभ (Operational Advantage) प्रदान करेगा।


सादर,

केशव राम सिंघल


A Crucial Note for Blog Readers 

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Readers of this blog should note that the articles, write-ups, and information provided here are intended solely to create awareness and serve as an academic reference study. They must not be used as a substitute for official Environmental Management System (EMS) standards, including the ISO 14001:2026 EMS standard.


Organizations implementing ISO 14001:2026 EMS must possess an official copy of the standard. For a comprehensive implementation, it is highly recommended to secure a set of three core standards -


- ISO 14000 (incorporating the latest updates as the previous version undergoes revision)

- ISO 14001:2026 

- ISO 19011:2026


Furthermore, the procurement of additional standards from the ISO 14000 family will provide a distinct operational advantage.


Regards,

Keshav Ram Singhal 


शनिवार, 30 मई 2026

भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा IS/ISO 14001:2026 EMS मानक प्रकाशित (Bureau of Indian Standards publishes IS/ISO 14001:2026 EMS Standard)

 भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा IS/ISO 14001:2026 EMS मानक प्रकाशित

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प्रतीकात्मक चित्र साभार GoogleGemini 


अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर स्टैंडर्डाइज़ेशन - ISO) द्वारा ISO 14001:2026 EMS मानक प्रकाशित करने के बाद, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने इस मानक को भारतीय मानक के तौर पर अपनाकर प्रकाशित कर दिया है और अब यह IS/ISO 14001:2026 EMS के तौर पर उपलब्ध है, जिसका शीर्षक है "पर्यावरणीय प्रबंधन पद्धतियाँ - उपयोग के लिए मार्गदर्शन सहित अपेक्षाएँ।"


यह मानक BIS या BSB Edge के सेल्स काउंटर से प्राप्त किया जा सकता है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


Bureau of Indian Standards publishes IS/ISO 14001:2026 EMS standard

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Following the publication of the ISO 14001:2026 EMS standard by the International Organization for Standardization (ISO), the Bureau of Indian Standards (BIS) has adopted and published this standard as an Indian Standard, and it is now available as IS/ISO 14001:2026 EMS, titled "Environmental Management Systems - Requirements with Guidance for Use."


This standard can be obtained from the sales counters of BIS or BSB Edge.


Regards,

Keshav Ram Singhal