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Keshav Ram Singhal

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शुक्रवार, 19 जून 2026

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) तय करना

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) तय करना 

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ISO 14001:2026 EMS  मानक के खंड 4.3 के अनुसार, संगठन को अपनी पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) निर्धारित करना आवश्यक है। यह कार्यक्षेत्र संगठन की EMS की सीमाओं (Boundaries) और लागू होने की उपयुक्तता (Applicability) को स्पष्ट करता है।


कार्यक्षेत्र तय करते समय विचार करने योग्य बिंदु


संगठन को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) निर्धारित करते समय निम्न पहलुओं पर विचार करना चाहिए -


a) मानक के खंड 4.1 के अनुसार बाहरी और आंतरिक मुद्दे (External and Internal Issues)

b) मानक के खंड 4.2 के अनुसार इच्छुक पक्षों की अपेक्षाएँ और अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations)

c) संगठनात्मक इकाइयाँ, कार्य और भौतिक सीमाएँ (Organizational, Functional & Physical Boundaries)

d) गतिविधियाँ, उत्पाद और सेवाएँ (Activities, Products and Services)

e) जीवन चक्र (Life Cycle) के संदर्भ में नियंत्रण और प्रभाव की क्षमता


कार्यक्षेत्र (Scope) का महत्व 


एक बार संगठन के पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) निर्धारित हो जाने के बाद उस कार्यक्षेत्र (Scope) के अंतर्गत आने वाली सभी गतिविधियाँ, उत्पाद और सेवाएँ पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) में शामिल होती हैं। पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के कार्यक्षेत्र (Scope) को प्रलेखित जानकारी (Documented Information) के रूप में बनाए रखना आवश्यक है। पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) इच्छुक पक्षों के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए


कार्यक्षेत्र कथन (Scope Statement)


ABC कंपनी का पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) 

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ABC कंपनी के सभी कार्यालय और निर्माण इकाईयाँ, जो ऑटोमोबाइल पार्ट्स के निर्माण, पैकेजिंग और वितरण से संबंधित गतिविधियों में संलग्न है, पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) में शामिल हैं। 


या 


XYZ कंपनी का पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope)

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XYZ कंपनी के जयपुर स्थित निर्माण इकाई में ऑटोमोबाइल पार्ट्स के निर्माण, पैकेजिंग और वितरण से संबंधित सभी गतिविधियाँ पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) में शामिल हैं।


कार्यक्षेत्र (Scope) की सीमाएँ 


1. आंशिक लागू (Partial Scope) - जब एक बड़ी कंपनी केवल एक प्लांट (Plant) में पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) लागू करती है। जैसे उदाहरण - “केवल पुणे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट” में। 


2. पूरे संगठन में लागू - जब पूरा संगठन पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) के अंतर्गत आता है। जैसे उदाहरण - “कम्पनी की सभी निर्माण और सेवा इकाइयाँ”। 


3. सेवा क्षेत्र (Service Sector) - जब एक IT कंपनी केवल डेटा सेंटर संचालन को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) में शामिल करती है। 


लचीलापन (Flexibility)


संगठन को यह स्वतंत्रता है कि वह चाहे तो पूरे संगठन पर पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) लागू करे या केवल चयनित इकाइयों/प्रक्रियाओं (Units/Processes) पर लागू करे। उदाहरण के लिए - एक बैंक केवल अपने मुख्य कार्यालय (Head Office) में पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) लागू कर सकता है। एक निर्माण कंपनी (Manufacturing Company) केवल कुछ चयनित इकाइयों में पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) लागू कर सकती है।  


जीवन चक्र (Life Cycle) दृष्टिकोण का प्रभाव 


कार्यक्षेत्र (Scope) तय करते समय, पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की साख (Credibility) संगठनात्मक सीमाओं के चुनाव पर निर्भर करती है। संगठन जीवन चक्र (Life cycle) के नज़रिए से गतिविधि, उत्पाद और सेवा (Activity, Product and Service) पर अपने नियंत्रण या प्रभाव की सीमा पर विचार करता है। जो संगठन के ज़रूरी कामों [जैसे संसाधनों की आवंटन (Resource allocation), निर्णय लेने (Decision making), दूसरे तरह के समर्थन (Support) के लिए दूसरे अस्तित्व (जैसे ग्लोबल या रीजनल ऑफिस)] पर निर्भर करते हैं, उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि यह रिश्ता उनके संचालन और उनके पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के कार्यक्षेत्र (Scope) पर कैसे असर डालता है। अर्थात् कार्यक्षेत्र (Scope) तय करते समय संगठन को यह देखना चाहिए कि वह किन गतिविधियों पर नियंत्रण रख सकता है और किन गतिविधियों पर केवल प्रभाव डाल सकता है। उदाहरण के लिए एक कंपनी अपने प्रदाता (Supplier) को पर्यावरण के अनुकूल कच्चा माल (Eco-friendly raw material) उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है और ग्राहक उपयोग के दौरान ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) बढ़ाने के निर्देश देती है। उदाहरण के लिए एक एयर कंडीशनर निर्माता लिख सकता है, “तापमान 24–26°C पर रखें, दरवाजे और खिड़कियाँ बंद रखें, और नियमित रूप से फ़िल्टर साफ करें।”


अन्य इकाइयों पर निर्भरता (Dependency) उदाहरण


यदि संगठन वैश्विक प्रधान कार्यालय (Global Head Office) पर निर्भर है या Shared Services (HR, Procurement) बाहर से मिलते हैं तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह EMS Scope को कैसे प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए कार्यक्षेत्र (Scope) में लिखा जा सकता है कि पर्यावरण नीति (Environment policy) वैश्विक प्रधान कार्यालय द्वारा बनाई जाती है लेकिन कार्यान्वयन स्थानीय इकाई (Local Unit) द्वारा किया जाता है। 


कार्यक्षेत्र (Scope) तय करते समय सावधानियाँ 


कार्यक्षेत्र (Scope) का उपयोग महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहलुओं को बाहर करने के लिए, अनुपालन दायित्वों से बचने के लिए या पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) को “कागजी” दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए कोई संगठन केवल कार्यालय क्षेत्र को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) में शामिल करे और उत्पादन क्षेत्र को शामिल न करे जबकि प्रदूषण उत्पादन क्षेत्र से हो रहा हो। इस सम्बन्ध में सही दृष्टिकोण यह है कि सभी महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव वाली इकाईयाँ और कार्य शामिल हों। 


विश्वसनीयता (Credibility)


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की साख (Credibility) इस पर निर्भर करती है कि पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) वास्तविक (Realistic) हो, पूर्ण (Complete) हो और भ्रामक (Misleading) न हो। 


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) की उपलब्धता इच्छुक पक्षों को (Availability to Interested Parties)


जब संगठन ISO 14001:2026 EMS मानक की पालना करने का दावा करता है तो उसे पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) को इच्छुक पक्षों के लिए उपलब्ध कराना आवश्यक है। उदाहरण के लिए संगठन इसे अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर सकता है, संगठन प्रोफाइल/विवरणिका में शामिल कर सकता है। 


सार 


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) निर्धारित करना ISO 14001:2026 EMS  का एक महत्वपूर्ण चरण है। एक स्पष्ट और उचित कार्यक्षेत्र (Scope) पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की प्रभावशीलता सुनिश्चित करता है, संगठन की विश्वसनीयता बढ़ाता है और अनुपालन तथा पर्यावरणीय प्रदर्शन सुधार में सहायक होता है। 


सादर,

केशव राम सिंघल 


गुरुवार, 18 जून 2026

इच्छुक पक्षों (Interested Parties) की ज़रूरतों और उम्मीदों को समझना

इच्छुक पक्षों (Interested Parties) की ज़रूरतों और उम्मीदों को समझना

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ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 4.2 के अनुसार, संगठन को निम्न निर्धारित करना आवश्यक है -


a) ऐसे इच्छुक पक्ष (Interested Parties) जो पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के लिए प्रासंगिक हैं;

b) इन इच्छुक पक्षों की ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and Expectations);

c) इनमें से कौन-सी ज़रूरतें और उम्मीदें संगठन का अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations) बनती हैं (संदर्भ: खंड 6.1.3)।


इच्छुक पक्ष कौन हो सकते हैं?


संगठन के इच्छुक पक्ष आंतरिक और बाह्य दोनों हो सकते हैं, जैसे -


* कर्मचारी (Employees)

* ग्राहक (Customers)

* आपूर्तिकर्ता (Suppliers)

* नियामक संस्थाएँ (Regulatory Authorities)

* स्थानीय समुदाय (Local Community)

* निवेशक (Investors)

* गैर-सरकारी संगठन (NGOs)

* सरकार एवं न्यायालय (Government & Courts) 


ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and Expectations)


इच्छुक पक्षों की ज़रूरतें और उम्मीदें पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती हैं, जैसे प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करना, प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग (जैसे पानी का दुरूपयोग रोकना), ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG Emissions) में कमी, जैव विविधता (Biodiversity) की सुरक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य (Ecosystem Health) बनाए रखना। 


अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations) क्या हैं? 


* कानूनी दायित्व (Laws, Regulations, Permits, Licenses)

* अन्य स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएँ (Voluntary Commitments) 


उदाहरण - 


  * ग्राहक की पर्यावरणीय अपेक्षाएँ 

  * उद्योग मानक (Industry Codes)

  * पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक (Environmental , Social and Governance - ESG)

  * स्थिरता प्रतिबद्धता (Sustainability commitments)


यहाँ महत्वपूर्ण बात यह है कि जब संगठन किसी अपेक्षा को अपनाने का निर्णय लेता है, तो वह उसके लिए अनुपालन दायित्व (Compliance obligation) बन जाती है।


व्यावहारिक उदाहरण (Practical Examples) 


1. नियामक अपेक्षा - सरकार द्वारा निर्धारित उत्सर्जन सीमा का पालन करना। यह कानूनी अनुपालन दायित्व है। 

2. ग्राहक अपेक्षा - केवल Eco-friendly packaging का उपयोग, जैसे ग्राहक कहता है कि उसे उत्पाद प्लास्टिक की पैकिंग में नहीं दिया जाए। यदि संगठन स्वीकार करता है  तो यह उसके लिए अनुपालन दायित्व है। 

3. समुदाय अपेक्षा - शोर (Noise) और धूल (Dust) कम करना। यह सामाजिक दायित्व है, जिसे अपनाने पर यह EMS में शामिल होकर अनुपालन दायित्व बन जाता है। 

4. निवेशक अपेक्षा - Sustainability रिपोर्ट प्रकाशित करना। ESG प्रतिबद्धता अपनाने पर यह अनुपालन दायित्व बन जाता है। 

5. स्वैच्छिक पहल (Voluntary Initiative) - संगठन द्वारा Carbon neutrality लक्ष्य घोषित करना। घोषित करने पर यह अनुपालन दायित्व बन जाता है। 


महत्वपूर्ण स्पष्टता 


यहॉं यह समझना आवश्यक है कि सभी ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and expectations) “अनिवार्य” नहीं होतीं। संगठन को यह निर्णय लेना होता है कि कौन-सी ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and expectations) अपनानी हैं और कौन-सी EMS में शामिल करनी हैं। 


निर्णय लेने की प्रक्रिया 


संगठन को चाहिए कि वह प्रासंगिक इच्छुक पक्षों की पहचान करे, उनकी जरूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) का विश्लेषण करे, जोखिमों और अवसरों (Risks and Opportunities) का आकलन करे और यह तय करे कि किन ज़रूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) को अपनाना है। इस कार्य के लिए संगठन में एक टास्क फ़ोर्स का गठन करना उपयोगी हो सकता है। 


पर्यावरणीय संदर्भ से जुड़ाव 


इच्छुक पक्षों की अपेक्षाएँ अक्सर पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ी होती हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन (Climate Change), संसाधनों की कमी (Resource Scarcity), प्रदूषण स्तर (Pollution Levels), जैव विविधता ह्रास (Loss of Biodiversity)। इनका सही विश्लेषण संगठन को बेहतर EMS योजना बनाने में मदद करता है।


EMS के साथ संबंध 


* खंड 4.2 → जरूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) की पहचान

* खंड 6.1.1 → इन अपेक्षाओं से जुड़े जोखिमों और अवसरों (Risks and Opportunities) का निर्धारण 

* खंड 6.1.3 → अनुपालन दायित्व निर्धारण (Compliance Obligations)

* खंड 4.4 → इन सभी को EMS में एकीकृत करना और लागू करना 


सार 


इच्छुक पक्षों की जरूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) को समझना ISO 14001 EMS का एक महत्वपूर्ण आधार है। यदि संगठन इन अपेक्षाओं का सही विश्लेषण करता है और उचित रूप से उन्हें अपनाता है, तो वह बेहतर अनुपालन सुनिश्चित कर सकता है, जोखिमों को कम कर सकता है और अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन में निरंतर सुधार कर सकता है। 


सादर, 

केशव राम सिंघल 


मंगलवार, 16 जून 2026

संगठन और उसके प्रसंग को समझना (Understanding the organization and its context)

संगठन और उसके प्रसंग को समझना (Understanding the organization and its context) 

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ISO 14001:2026 EMS मानक खंड 4.1 की अपेक्षाओं के अनुसार, संगठन को उन सभी आंतरिक (Internal) और बाह्य (External) मुद्दों का निर्धारण करना आवश्यक है, जो उसके उद्देश्य (Purpose) के लिए प्रासंगिक हैं और उसकी पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के अपेक्षित परिणामों को प्राप्त करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।


इन मुद्दों में वे पर्यावरणीय परिस्थितियाँ (Environmental Conditions) भी शामिल होती हैं, जो संगठन को प्रभावित करती हैं या संगठन द्वारा प्रभावित हो सकती हैं, जैसे प्रदूषण का स्तर, प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता (Biodiversity) तथा पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य (Ecosystem Health)। इस अपेक्षा का उद्देश्य संगठन को उन प्रमुख मुद्दों की समग्र समझ प्रदान करना है, जो उसके संचालन (Operations) को प्रभावित करते हैं, उसकी पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रबंधन को प्रभावित करते हैं, तथा EMS के अपेक्षित परिणामों पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।


आंतरिक और बाह्य मुद्दों के कुछ उदाहरण


(A) पर्यावरणीय परिस्थितियाँ


* वायु और जल की गुणवत्ता (Air and Water Quality)

* भूमि उपयोग (Land Use)

* मौजूदा प्रदूषण स्तर 

* प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता

* जैव विविधता की स्थिति

* पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य


उदाहरण - यदि कोई उद्योग जल-आधारित उत्पादन करता है, तो स्थानीय जल की उपलब्धता और गुणवत्ता उसके लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगी।


(B) बाह्य मुद्दे (External Issues)


* सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियाँ

* राजनीतिक और कानूनी ढाँचा

* नियामक (Regulatory) अपेक्षाएँ

* आर्थिक और तकनीकी विकास

* प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण


उदाहरण - सरकार द्वारा लागू नई पर्यावरणीय नियमावली या कानून संगठन की अनुपालन रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।


(C) आंतरिक मुद्दे (Internal Issues)


* संगठन की गतिविधियाँ, उत्पाद और सेवाएँ (Organization's activities, products and services)

* पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental Performance)

* रणनीतिक दिशा (Strategic Direction)

* संगठनात्मक संस्कृति (Organizational Culture)

* क्षमताएँ (Knowledge, Processes, Systems)


उदाहरण - यदि संगठन में पर्यावरणीय जागरूकता कम है, तो EMS का कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में जागरूकता बढ़ाने के लिए उचित कदम उठाना आवश्यक है।


पर्यावरणीय परिस्थितियों की प्रकृति


यहॉं ध्यान देने की बात है कि पर्यावरणीय परिस्थितियाँ स्थानीय, क्षेत्रीय या वैश्विक (Local, Regional or Global) हो सकती हैं, अचानक (Sudden) या धीरे-धीरे (Gradual) बदल सकती हैं, तथा एक-दूसरे से परस्पर जुड़ी होती हैं।


उदाहरण - जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जल संसाधनों, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ प्रभावित करता है। इसलिए, इन परस्पर संबंधों (Interrelationships) को समझना प्रभावी पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।


पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और उसका महत्व


पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) जीवित और निर्जीव तत्वों का एक परस्पर जुड़ा हुआ तंत्र है, जिसमें शामिल होते हैं पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव (Microorganisms), जल, मिट्टी और वायु। उदाहरण - जंगल, झील, मैंग्रोव, घास के मैदान, रेगिस्तान आदि।


पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य (Ecosystem Health) का अर्थ है पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना (Structure), कार्य क्षमता (Functionality) और लचीलापन (Resilience) बनाए रखने की क्षमता। संगठन पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर निर्भर भी होते हैं, और अपनी गतिविधियों से उन्हें प्रभावित भी करते हैं।


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के साथ संबंध


संगठन के प्रसंग की समझ का उपयोग पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) को स्थापित (Establish) करने, कार्यान्वित (Implement) करने, बनाए रखने (Maintain) तथा निरंतर सुधार (Continual Improve) करने में किया जाता है।


ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 4.1 के अनुसार पहचाने गए मुद्दे संगठन के लिए जोखिम (Risks) और अवसर (Opportunities) उत्पन्न करते हैं, जिन्हें संगठन को आयोजना (Clause 6), सहयोग व संचालन (Clause 7, 8) तथा निष्पादन मूल्यांकन (Clause 9) के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना होता है।


बाहरी और अंदरूनी मुद्दों के निर्धारण की प्रक्रिया (Process for Determination) यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ISO 14001:2026 EMS मानक बाहरी और अंदरूनी मुद्दों का पता लगाने के तरीके के बारे में कोई विशिष्ट पद्धति या मार्गदर्शन नहीं देता है। यह संगठन पर निर्भर करता है कि वह अपनी प्रकृति और आकार के अनुकूल कोई भी उपयुक्त तरीका या प्रक्रिया अपनाए। व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए, इस प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल हो सकते हैं - - टीम का गठन (Team Formation) - संगठन के शीर्ष प्रबंधन (Top Management/Leadership) को ऐसे योग्य लोगों की एक क्रॉस-फंक्शनल टीम बनानी चाहिए, जो संगठन के संचालन, उसकी प्रक्रियाओं और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की अच्छी समझ रखते हों। - विचार-मंथन (Brainstorming) - टीम के सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से और सामूहिक रूप से मंथन करना चाहिए ताकि उन प्रासंगिक मुद्दों की पहचान की जा सके जो संगठन के रणनीतिक उद्देश्यों और EMS को प्रभावित कर सकते हैं। - मुद्दों का संकलन (Compilation and Listing) - पहचाने गए सभी मुद्दों को एक स्थान पर संकलित किया जाना चाहिए। टीम को उनके महत्व और प्रभाव के विवरण के साथ इन मुद्दों की एक औपचारिक सूची (Register/List) तैयार करनी चाहिए। - निगरानी और समीक्षा (Monitoring and Review) - बदलते परिवेश के साथ ये मुद्दे भी बदल सकते हैं, इसलिए टीम को एक निश्चित समयांतराल पर इन मुद्दों पर नज़र रखनी चाहिए और नियमित रूप से उनकी समीक्षा करनी चाहिए।


संबंधित मानकों का संदर्भ (मार्गदर्शन हेतु)


पर्यावरणीय परिस्थितियों को बेहतर समझ के लिए निम्न मानकों को संदर्भ रूप में मार्गदर्शन के लिए देखा जा सकता है, पर यह ISO 14001:2026 EMS मानक की अपेक्षा (Requirement) नहीं है -


* ISO 14002-1:2019 — Environmental management systems — Guidelines for using ISO 14001 to address environmental aspects and conditions within an environmental topic area — Part 1: General

* ISO 14055-1:2017 — Environmental management — Guidelines for establishing good practices for combating land degradation and desertification — Part 1: Good practices framework 

* ISO 14080:2018 — Greenhouse gas management and related activities — Framework and principles for methodologies on climate actions  

* ISO 14090:2019 — Adaptation to climate change — Principles, requirements and guidelines  

* ISO 14091:2021 — Adaptation to climate change — Guidelines on vulnerability, impacts and risk assessment  

* ISO 17298:2025 — Biodiversity — Considering biodiversity in the strategy and operations of organizations — Requirements and guidelines 

* ISO 59014:2024 — Circular economy — Sustainability and traceability of secondary materials — Requirements and guidance 


मानकों की यह सूची देते समय ध्यान रखा गया है कि नवीनतम मानक ही लिखा जाए, फिर भी कोई गलती हो जाने या भविष्य में किसी मानक के संशोधित होने पर नवीनतम मानक ही सन्दर्भ के लिए देखा जाना चाहिए। 


मुख्य बिंदु (Quick Takeaways)


* अनिवार्य अपेक्षा - आंतरिक और बाह्य मुद्दों का निर्धारण (Clause 4.1) EMS प्रणाली की सफलता के लिए अनिवार्य है।

* परस्पर जुड़ाव - जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य स्थानीय और वैश्विक स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हैं।

* मार्गदर्शन (गैर-अनिवार्य) - ISO 14002, 17298 और 59014 जैसे मानक प्रसंग को समझने में सहायक हैं, लेकिन ऑडिट के लिए अनिवार्य आवश्यकता नहीं हैं।


सार


संगठन और उसके प्रसंग को समझना ISO 14001:2026 EMS मानक का एक मूलभूत आधार है। यदि संगठन अपने आंतरिक और बाह्य मुद्दों तथा पर्यावरणीय परिस्थितियों को सही तरीके से समझता है, तो वह बेहतर निर्णय ले सकता है, जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन कर सकता है, तथा अपने पर्यावरणीय निष्पादन में निरंतर सुधार कर सकता है।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)

सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)

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किसी भी प्रबंध प्रणाली के कार्यान्वयन में अक्सर तीन प्रकार की कार्रवाइयों—सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)—का सामना होता है। ये तीनों पद कई बार भ्रम उत्पन्न करते हैं। सुधार (Correction) से समस्या ठीक होती है, सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) से समस्या का कारण समाप्त किया जाता है और निवारक कार्रवाई (Preventive Action) के माध्यम से समस्या उत्पन्न होने से पहले ही उसके संभावित कारण को दूर कर दिया जाता है।


सुधार (Correction) = समस्या को तुरंत ठीक करना।

सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) = समस्या के मूल कारण को खोजकर उसे समाप्त करना ताकि वही समस्या दोबारा न हो।

निवारक कार्रवाई (Preventive Action) = समस्या उत्पन्न होने से पहले उसके संभावित कारण को समाप्त करना।


उदाहरण के तौर पर इसे इस प्रकार समझा जा सकता है। मैंने देखा कि मेरे घर की छत से बारिश का पानी टपक रहा है। समस्या देखकर मैंने बाल्टी रखकर पानी को फर्श पर फैलने से रोक दिया और टपकने वाली जगह पर अस्थायी सीलेंट लगा दिया। यह सुधार (Correction) है, क्योंकि मैंने तत्काल समस्या को संभाल लिया, लेकिन पानी टपकने का मूल कारण अभी भी समाप्त नहीं हुआ।


इसके बाद मैंने समस्या के मूल कारण को खोजने का प्रयास किया और पाया कि घर की छत की वॉटरप्रूफिंग खराब हो गई है। यह समस्या दोबारा न हो, इसके लिए मैंने पूरी छत की मरम्मत करवाई और नई वॉटरप्रूफिंग करवाई। यह सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) है, क्योंकि मैंने पानी टपकने के मूल कारण को समाप्त कर दिया।


पिछले वर्ष बारिश के दिनों में मैंने अपने पड़ोसी के घर की छत से पानी टपकने की समस्या देखी थी। यद्यपि उस समय मेरे घर में ऐसी कोई समस्या नहीं हुई थी, फिर भी इस बार वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले मैंने अपनी छत का निरीक्षण करवाया। निरीक्षण में पता चला कि मेरी छत की वॉटरप्रूफिंग भी पुरानी हो चुकी है। इसलिए मैंने वर्षा ऋतु आने से पहले ही उसकी वॉटरप्रूफिंग करवा ली। यह निवारक कार्रवाई (Preventive Action) है, क्योंकि मैंने संभावित समस्या को उत्पन्न होने से पहले ही रोक दिया।


एक अन्य सरल उदाहरण से भी इन अवधारणाओं को समझा जा सकता है। मैं अपने स्कूटर से बाजार जा रहा था कि रास्ते में मेरे स्कूटर का टायर पंचर हो गया। मैंने पंचर ठीक करवा लिया। यह सुधार (Correction) है।


जब पंचर की मरम्मत करवाई जा रही थी, तब मैंने देखा कि ट्यूब में बड़ा पंचर है और पहले भी उसमें कई बार पंचर हो चुके हैं। स्थायी समाधान के लिए मैंने नई ट्यूब लगवा ली। यह सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) है।


बाद में जब मेरा स्कूटर नियमित सर्विसिंग के लिए गया, तब मैंने टायर और ट्यूब की स्थिति की जाँच करवाई। उनके अधिक पुराने और घिसे हुए होने के कारण मैंने उन्हें पहले ही बदलवा दिया, ताकि पंचर जैसी समस्या उत्पन्न न हो। यह निवारक कार्रवाई (Preventive Action) है।


ये तीनों पद वास्तव में तीन महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं, जो हमारे दैनिक जीवन में भी लागू होती हैं और विभिन्न प्रबंध प्रणालियों, जैसे ISO 9001 तथा ISO 14001, के कार्यान्वयन में भी व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।


सुधार (Correction) → समस्या ठीक करो।

सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) → समस्या के कारण को समाप्त करो।

निवारक कार्रवाई (Preventive Action) → समस्या आने से पहले उसके कारण को समाप्त करो।


यदि कोई संगठन इन तीनों अवधारणाओं का नियमित रूप से उपयोग करता है, तो उसकी प्रबंध प्रणाली निश्चित रूप से अधिक प्रभावी और मजबूत बनती है। हालाँकि वर्तमान प्रबंध प्रणाली मानकों में 'निवारक कार्रवाई' (Preventive Action) शब्द का प्रत्यक्ष उपयोग पहले की भाँति नहीं किया जाता है, फिर भी इसकी मूल अवधारणा आज भी विद्यमान है। अब संभावित जोखिमों और अवसरों की पहचान तथा उन्हें संबोधित करने की अपेक्षा के माध्यम से निवारक कार्रवाई की भावना को प्रबंध प्रणालियों में समाहित किया गया है।


एक मजबूत प्रबंध प्रणाली केवल समस्याओं को ठीक नहीं करती, बल्कि उनके कारणों को समाप्त करती है और संभावित समस्याओं को उत्पन्न होने से पहले ही रोकने का प्रयास करती है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


सोमवार, 15 जून 2026

ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड (Clauses) – संक्षेप में

ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड (Clauses) – संक्षेप में

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ISO 14001:2026 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जो संगठनों को उनके पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार हेतु एक व्यवस्थित ढाँचा प्रदान करता है। इसकी अपेक्षाएँ (Requirements) सामान्य (Generic) हैं और किसी भी प्रकार, आकार, उत्पाद या सेवा वाले संगठन पर लागू की जा सकती हैं।


खंड 1 – कार्यक्षेत्र (Scope)


इस खंड में मानक के उद्देश्य और उसके लागू होने की सीमा (Scope) का वर्णन किया गया है।


खंड 2 – मानक सन्दर्भ (Normative References)


इस खंड में कोई विशिष्ट संदर्भ मानक नहीं दिया गया है। हालाँकि, समझ के लिए ISO 9000 तथा ISO 14000 जैसे मानकों को संदर्भ रूप में देखा जा सकता है।


खंड 3 – शब्दावली और परिभाषाएँ (Terms and Definitions)


इस खंड में मानक में प्रयुक्त महत्वपूर्ण पदों और उनकी परिभाषाओं का वर्णन किया गया है।


खंड 4 से 10 – EMS की अपेक्षाएँ (Requirements of EMS)


खंड 4 – संगठन का प्रसंग (Context of the Organization) 


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ -

* संगठन और उसके प्रसंग की समझ (Understanding the organization and its context)

* इच्छुक पक्ष (Interested Parties) 

* EMS का कार्यक्षेत्र (Scope)

* EMS की स्थापना 


खंड 5 – नेतृत्व (Leadership) 


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* शीर्ष प्रबंधन की भूमिका और प्रतिबद्धता (Role and commitment of top management)

* पर्यावरणीय नीति की स्थापना (Establishing environmental policy)

* भूमिकाएँ, जिम्मेदारियाँ और प्राधिकार (Roles, responsibilities and authorities) 


खंड 6 – आयोजना (Planning)

 

निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* सामान्य (General)

* पर्यावरणीय पहलूओं का निर्धारण (Determining environmental aspects)

* अनुपालन दायित्व (Compliance obligations) 

* जोखिम और अवसरों का निर्धारण और सम्बोधन (Determining and addressing risks and opportunities) 

* आयोजना कार्रवाई (Planning action)

* पर्यावरणीय उद्देश्य (Environmental objectives)

* परिवर्तन की योजना (Planning of Changes)


खंड 7 – समर्थन (Support)


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* संसाधन (Resources)

* दक्षता (Competence)

* जागरूकता (Awareness)

* संप्रेषण (Communication)

* प्रलेखित जानकारी (Documented Information) 


खंड 8 – संचालन (Operation)


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* संचालन आयोजना और नियंत्रण (Operational planning and control)

* आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया (Emergency preparedness and response)


खंड 9 – प्रदर्शन मूल्यांकन (Performance Evaluation)


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* निगरानी, मापन, विश्लेषण और मूल्यांकन (Monitoring, measurement, analysis and evaluation)

* अनुपालन का मूल्यांकन (Compliance evaluation)

* आंतरिक संपरीक्षण (Internal Audit)

* प्रबंधन समीक्षा (Management Review)


खंड 10 – सुधार (Improvement)


निम्न से सम्बंधित अपेक्षाएँ - 

* निरंतर सुधार (Continual Improvement)

* अपालना (Nonconformity) और सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective action) 

 

अनुलग्नक A (Annex A – Informative)


इस भाग में ISO 14001 मानक के उपयोग और कार्यान्वयन हेतु मार्गदर्शन (Guidance) प्रदान किया गया है।


ग्रंथसूची (Bibliography)


मानक के अंत में संबंधित संदर्भ सामग्री की सूची दी गई है। 


PDCA Mapping (ISO 14001 EMS) 


ISO 14001;2026 EMS मानक के विभिन्न खंडों (Clauses) को PDCA (Plan-Do-Check-Act) चक्र के साथ निम्न प्रकार मैप किया जा सकता है - 


Plan (आयोजना) चरण - सम्बंधित खंड 4, 5, 6 - प्रमुख फोकस - संगठन का प्रसंग, नेतृत्व, जोखिम और अवसर, उद्देश्य निर्धारण

Do (कार्यान्वयन) चरण - सम्बंधित खंड 7, 8 - प्रमुख फोकस - संसाधन, दक्षता, संप्रेषण, संचालन नियंत्रण

Check (जाँच) चरण - सम्बंधित खंड 9 - प्रमुख फोकस - निगरानी, मापन, आंतरिक ऑडिट, प्रबंधन समीक्षा

Act (सुधार) चरण - सम्बंधित खंड 10 - प्रमुख फोकस - सुधारात्मक कार्रवाई, निरंतर सुधार













यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि खंड 5 (नेतृत्व/Leadership) को हालांकि 'Plan' चरण के साथ समझा जाता है, लेकिन ISO के आधुनिक ढांचे के अनुसार, नेतृत्व पूरे PDCA चक्र के केंद्र (Center) में होता है जो बाकी चारों चरणों को गति और दिशा देता है। इस पूरे चक्र का केंद्रीय लक्ष्य और अंतिम उद्देश्य 'निरंतर सुधार' (Continual Improvement) को हासिल करना है। यह मैपिंग दर्शाती है कि ISO 14001 मानक एक व्यवस्थित और निरंतर सुधार आधारित प्रबंधन प्रणाली प्रदान करता है।


सार 


ISO 14001 EMS मानक का ढाँचा Plan-Do-Check-Act (PDCA) अवधारणा पर आधारित है, जो संगठन को एक व्यवस्थित, चरणबद्ध और प्रभावी तरीके से पर्यावरणीय प्रबंधन लागू करने में सहायता करता है। खंड 4 से 10 तक की अपेक्षाएँ मिलकर एक ऐसा प्रबंधन तंत्र बनाती हैं, जो न केवल अनुपालन सुनिश्चित करता है, बल्कि निरंतर सुधार और सतत विकास (Sustainable Development) को भी प्रोत्साहित करता है।


सादर,

केशव राम सिंघल