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Keshav Ram Singhal

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Tuesday, April 7, 2026

ISO 14001 EMS कार्यान्वयन

 ISO 14001 EMS कार्यान्वयन 

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe


ISO 14001 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का सफल कार्यान्वयन संगठन के उच्च प्रबंधन के नेतृत्व (Leadership) और सभी स्तरों पर कार्यरत कर्मचारियों की प्रतिबद्धता (Commitment) पर निर्भर करता है।


ISO 14001 कार्यान्वयन से संगठन पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं और सकारात्मक प्रभावों को बढ़ा सकते हैं। यह विशेष रूप से उन पर्यावरणीय प्रभावों के लिए महत्वपूर्ण है, जो संगठन की रणनीतिक दिशा और प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को प्रभावित करते हैं। 


उच्च प्रबंधन को चाहिए कि वह पर्यावरणीय प्रबंधन को —


* संगठन की व्यवसाय प्रक्रियाओं (Business processes) में शामिल करे,

* निर्णय लेने की प्रक्रिया से जोड़े,

* तथा अन्य व्यावसायिक प्राथमिकताओं (Business priorities) के साथ संतुलित करे।


साथ ही, पर्यावरणीय गवर्नेंस (Environmental Governance) को पूरे प्रबंधन तंत्र में एकीकृत करना आवश्यक है, ताकि जोखिमों और अवसरों (Risks and Opportunities) का प्रभावी प्रबंधन किया जा सके।


ISO 14001 मानक का प्रभावी कार्यान्वयन यह दर्शाता है कि संगठन के पास एक सक्षम पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) है, जिससे रुचि रखने वाले पक्षों (Interested Parties) का विश्वास बढ़ता है। हालाँकि, केवल प्रमाणन (Certification) से सर्वोत्तम पर्यावरणीय परिणामों की स्वतः गारंटी नहीं मिलती। वैसे भी यह ध्यान देने की बात है कि ISO 14001 मानक स्वयं प्रमाणन (Certification) की अनिवार्यता निर्धारित नहीं करता; यह संगठन का स्वैच्छिक निर्णय होता है। संगठन चाहे तो ISO 14001 मानक का कार्यान्वयन बिना प्रमाणन लिए भी कर सकता है।  


संगठन का प्रसंग (Context of the Organization) - प्रत्येक संगठन का प्रसंग भिन्न होता है। इसलिए EMS का कार्यान्वयन भी अलग-अलग होगा। दो संगठन समान कार्य कर सकते हैं, फिर भी उनकी पर्यावरणीय नीति (Environmental Policy), तकनीक (Technology), निष्पादन लक्ष्यों (Performance objectives) और अनुपालन दायित्व (Compliance obligations) अलग हो सकते हैं। फिर भी वे ISO 14001 मानक की अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं।


EMS की जटिलता (Complexity of EMS) - EMS की संरचना और जटिलता निम्न पर निर्भर करती है —


* संगठन का आकार और प्रकृति

* गतिविधियाँ, उत्पाद और सेवाएँ

* पर्यावरणीय पहलू (Environmental Aspects) और प्रभाव (Impacts)

* अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations)


प्रमुख पदों (Key Terms) का संक्षिप्त स्पष्टीकरण


* पर्यावरणीय पहलू (Environmental Aspect) - गतिविधि का वह तत्व जो पर्यावरण को प्रभावित करता है।

* पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental Impact) - पर्यावरण में होने वाला परिवर्तन (सकारात्मक/नकारात्मक)।

* अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations) - कानूनी और अन्य अपेक्षाएँ जिनका पालन आवश्यक है।

* पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental Performance) - पर्यावरणीय प्रबंधन के परिणामस्वरूप प्राप्त मापनीय प्रदर्शन।

* जोखिम और अवसर (Risks and Opportunities) - संभावित स्थितियाँ जो EMS उद्देश्यों को प्रभावित कर सकती हैं।


चरणबद्ध (Step-by-Step) सिस्टेमैटिक एप्रोच 


संगठन ISO 14001 EMS कार्यान्वयन के लिए निम्न चरणबद्ध सिस्टेमैटिक एप्रोच अपना सकता है, जिससे ISO 14001 EMS मानक का कार्यान्वयन सफलतापूर्वक किया जा सकता है - 


1. उच्च प्रबंधन की प्रतिबद्धता - उच्च प्रबंधन को चाहिए कि वे ISO 14001 EMS कार्यान्वयन के लिए आवश्यक संसाधन, नीति और दिशा सुनिश्चित करें।


2. Steering Committee और Task Force का गठन - यदि संगठन बड़ा है तो भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण के लिए Steering Committee और Task Force का गठन किया जा सकता है। 


3. EMS Consultant की नियुक्ति (यदि आवश्यक हो) - EMS Consultant की नियुक्ति आवश्यक नहीं है, स्टीयरिंग कमिटी को यह तय करना चाहिए कि कंसल्टेंट की ज़रूरत है या नहीं। कंसल्टेंट को नियुक्त करना एक फ़ायदेमंद निवेश हो सकता है। एक सक्षम कंसल्टेंट ज्ञान का प्रभावी और त्वरित हस्तांतरण सुनिश्चित करता है।


4. ISO 14000 परिवार की जानकारी - संगठन के भीतर ISO 14000 परिवार से संबंधित मानकों की समझ विकसित करना।


5. जागरूकता, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन - जागरूकता, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित करना ताकि कर्मचारियों की समझ, क्षमता और सहभागिता बढ़े।


6. Action Plan बनाना - समयबद्ध और जिम्मेदारी आधारित योजना तैयार करना।


7. प्रारंभिक स्थिति सर्वेक्षण / अंतर विश्लेषण (Initial Status Survey / Gap Analysis) - वर्तमान स्थिति और अपेक्षाओं के बीच अंतर पहचानना। कौन-कौन सी अपेक्षाएँ लागू करना बाकी है, यह जानना।  


8. EMS का कार्यान्वयन (Implementation)


यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें निम्न गतिविधियाँ शामिल की जा सकती हैं —


* संगठन के प्रसंग (Context) और हितधारकों (Interested Parties) की पहचान

* पर्यावरणीय नीति (Environmental Policy) का निर्धारण

* पर्यावरणीय पहलुओं और प्रभावों का मूल्यांकन

* अनुपालन दायित्वों की पहचान

* उद्देश्यों (Objectives) और लक्ष्यों (Targets) का निर्धारण

* संसाधनों, भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का निर्धारण

* संचालन नियंत्रण (Operational Control) और प्रक्रियाओं का कार्यान्वयन

* निगरानी, मापन और मूल्यांकन (Monitoring & Measurement)

* आंतरिक ऑडिट (Internal Audit)

* प्रबंधन समीक्षा (Management Review)

* निरंतर सुधार (Continual Improvement)


9. Pre-assessment Audit - प्रमाणन से पहले कमियों की पहचान और सुधार।


10. Certification (यदि संगठन चाहे) - मान्यता प्राप्त प्रमाणन संस्था से प्रमाणन प्राप्त करना।


सार 


ISO 14001 EMS का कार्यान्वयन एक बार की गतिविधि नहीं, बल्कि निरंतर सुधार (Continual Improvement) की प्रक्रिया है। यदि संगठन चरणबद्ध, सिस्टेमैटिक और अनुशासित दृष्टिकोण अपनाता है, तो कार्यान्वयन की सफलता लगभग सुनिश्चित हो जाती है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देता है, बल्कि संगठन की विश्वसनीयता, अनुपालन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता को भी सुदृढ़ करता है तथा जोखिम-आधारित सोच (Risk-based Thinking) को बढ़ावा देता है। 


सादर, 

केशव राम सिंघल

 


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली का उद्देश्य

 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली का उद्देश्य

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चित्र साभार NightCafe 


ISO 14001 मानक पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System – EMS) के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जो संगठनों को पर्यावरण की सुरक्षा करने तथा बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने के लिए एक संरचित ढाँचा (Framework) प्रदान करता है। यह ढाँचा संगठन को सामाजिक एवं आर्थिक आवश्यकताओं के साथ संतुलन स्थापित करते हुए अपने पर्यावरणीय उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता करता है।


ISO 14001 मानक उन अपेक्षाओं (Requirements) को निर्दिष्ट करता (बताता) है, जिनके माध्यम से कोई भी संगठन अपनी पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली को प्रभावी रूप से स्थापित, कार्यान्वित, बनाए रख और निरंतर सुधार कर सकता है।


पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए EMS एक व्यवस्थित और रणनीतिक तरीका प्रदान करता है, जो संगठन के शीर्ष प्रबंधन को दीर्घकालिक सफलता और सतत विकास की दिशा में निर्णय लेने में सक्षम बनाता है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं —


* पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों (Adverse Impacts) को रोकना या कम करना;

* बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों (जैसे जलवायु परिवर्तन) के कारण संगठन पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों को कम करना;

* संगठन को उसके अनुपालन दायित्वों (Compliance Obligations) को पूरा करने में सक्षम बनाना;

* संगठन के पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental Performance) में निरंतर सुधार करना;

* उत्पादों और सेवाओं के डिज़ाइन, विकास और संचालन में पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल करना;

* जीवन-चक्र दृष्टिकोण (Life Cycle Perspective) अपनाकर उत्पादों और सेवाओं के डिज़ाइन से लेकर निपटान तक के सभी चरणों में पर्यावरणीय प्रभावों को नियंत्रित या प्रभावित करना, ताकि किसी एक चरण में प्रभाव को कम करते हुए उसे अन्य चरण में स्थानांतरित न किया जाए;

* पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाकर वित्तीय (Financial) और परिचालन (Operational) लाभ प्राप्त करना तथा संगठन की बाज़ार स्थिति को सुदृढ़ करना;

* पर्यावरण से संबंधित जानकारी को रुचि रखने वाले पक्षों (Interested Parties) तक प्रभावी रूप से पहुँचाना और पारदर्शिता बनाए रखना।


प्रमुख अवधारणाएँ (Key Terms Explained)


* पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental Performance) - संगठन द्वारा अपने पर्यावरणीय पहलुओं (Environmental Aspects) के प्रबंधन के परिणामस्वरूप प्राप्त मापनीय परिणामों को पर्यावरणीय निष्पादन कहा जाता है। उदाहरण - प्रदूषण में कमी, ऊर्जा की बचत, उत्सर्जन नियंत्रण आदि।


* अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations) - वे सभी कानूनी (Legal) और अन्य अपेक्षाएँ (Other Requirements) जिनका पालन संगठन को करना होता है, जैसे पर्यावरणीय कानून, नियम, लाइसेंस शर्तें या स्वैच्छिक अपेक्षाएँ।


* जीवन-चक्र दृष्टिकोण (Life Cycle Perspective) - उत्पाद या सेवा का पूरा जीवन-चक्र, जैसे उत्पाद या सेवा का डिज़ाइन, कच्चे माल की प्राप्ति, उत्पादन, वितरण, उपयोग और अंततः निपटान (Disposal) के दौरान होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों को समग्र रूप से समझने और नियंत्रित करने का दृष्टिकोण।


सार 


इस प्रकार, ISO 14001 मानक आधारित पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम ही नहीं है, बल्कि यह संगठनों को जोखिम प्रबंधन, अनुपालन, लागत नियंत्रण और सतत विकास की दिशा में एक समग्र और प्रभावी मार्ग प्रदान करती है।


सादर,

केशव राम सिंघल



Thursday, March 12, 2026

पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित तकनीकी समिति ISO/TC 207

पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित तकनीकी समिति ISO/TC 207

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 


पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास का कार्य International Organization for Standardization (ISO) की तकनीकी समिति ISO/TC 207 द्वारा किया जाता है। यह समिति पर्यावरण प्रबंधन (Environmental Management) से संबंधित ISO 14000 श्रृंखला के मानकों के विकास, संशोधन और समन्वय के लिए उत्तरदायी है। ISO/TC 207 के अंतर्गत कई उप-समितियाँ (Subcommittees – SC), कार्य समूह (Working Groups – WG) तथा शब्दावली समन्वय समूह (Terminology Coordination Group – TCG) कार्य करते हैं।


नीचे इनकी संक्षिप्त जानकारी दी जा रही है —


(1) ISO/TC 207 – SC 1 – पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management Systems)


यह उप-समिति पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) से संबंधित मानकों के विकास और संशोधन के लिए उत्तरदायी है। इस उप-समिति के अंतर्गत प्रमुख मानक हैं — ISO 14001 (Environmental Management Systems – Requirements) और ISO 14004 (EMS Guidelines) 


(2) ISO/TC 207 – SC 2 –  पर्यावरणीय संपरीक्षण और संबंधित जाँच (Environmental Auditing and Related Environmental Investigations)


यह उप-समिति पर्यावरणीय प्रबंधन प्रणालियों के ऑडिट और मूल्यांकन से संबंधित मार्गदर्शन / मानक विकसित करती है। उदाहरण - ISO 19011 (Management System Auditing Guidelines)


(3) ISO/TC 207 – SC 3 – पर्यावरणीय लेबलिंग (Environmental Labelling)


यह उप-समिति उत्पादों और सेवाओं के पर्यावरणीय लेबल और दावों से संबंधित मानकों के विकास पर कार्य करती है।  उदाहरण - ISO 14020 श्रृंखला (Environmental Labels and Declarations)


(4) ISO/TC 207 – SC 4 – पर्यावरणीय निष्पादन मूल्यांकन (Environmental Performance Evaluation)


यह उप-समिति संगठनों के पर्यावरणीय प्रदर्शन के मापन और मूल्यांकन से संबंधित मानकों को विकसित करती है। उदाहरण - ISO 14031 पर्यावरणीय निष्पादन मूल्यांकन (Environmental Performance Evaluation)


(5) ISO/TC 207 – SC 5 – लाइफ साइकिल आकलन (Life Cycle Assessment – LCA)


यह उप-समिति उत्पादों और सेवाओं के पूरे जीवन-चक्र के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन करने के लिए मानकों का विकास करती है। उदाहरण - ISO 14040 और ISO 14044 


(6) ISO/TC 207 – SC 7 –  ग्रीनहाउस गैस और जलवायु परिवर्तन प्रबंधन (Greenhouse Gas Management and Climate Change)


यह उप-समिति ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, कार्बन फुटप्रिंट और जलवायु परिवर्तन प्रबंधन से संबंधित मानकों के विकास के लिए उत्तरदायी है। उदाहरण - ISO 14064 श्रृंखला और ISO 14067 (Carbon Footprint)


(7) ISO/TC 207 – TCG – शब्दावली समन्वय समूह (Terminology Coordination Group)


यह समूह ISO 14000 श्रृंखला के विभिन्न मानकों में प्रयुक्त शब्दों और परिभाषाओं (Terms and Definitions) के समन्वय और एकरूपता को सुनिश्चित करता है।


(8) ISO/TC 207 – WG 4 – पर्यावरणीय संप्रेषण (Environmental Communication)


यह कार्य समूह संगठनों द्वारा पर्यावरणीय जानकारी के प्रभावी संप्रेषण और रिपोर्टिंग से संबंधित मार्गदर्शन विकसित करता है। उदाहरण - ISO 14063 (Environmental Communication Guidelines)


(9) ISO/TC 207 – WG 5 – जलवायु परिवर्तन (Climate Change)


यह कार्य समूह जलवायु परिवर्तन से संबंधित मानकों और मार्गदर्शिकाओं के विकास तथा समन्वय में सहयोग करता है।


यहाँ यह बताना जरूरी है कि ISO/TC 207 के अंतर्गत SC 6 (Subcommittee 6) पहले मौजूद थी, लेकिन अब यह सक्रिय (active) नहीं है। SC 6 का मुख्य कार्य पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित शब्दों और परिभाषाओं का विकास और समन्वय करना था। बाद में यह कार्य अधिक प्रभावी समन्वय के लिए Terminology Coordination Group (TCG) को स्थानांतरित कर दिया गया।


सार 


इस प्रकार तकनीकी समिति ISO/TC 207 पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इसकी विभिन्न उप-समितियाँ और कार्य समूह मिलकर ISO 14000 मानक श्रृंखला के माध्यम से विश्वभर के संगठनों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत विकास की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।


सादर,

केशव राम सिंघल


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली की पृष्ठभूमि (Background of Environmental Management System)

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली की पृष्ठभूमि (Background of Environmental Management System)
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सततता (Sustainability) के सामान्यतः तीन प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं, जिन्हें इस प्रकार कहा जा सकता है —

1. आर्थिक (Economic)
2. पर्यावरणीय (Environmental)
3. सामाजिक (Social)

कुछ विद्वान इन तीन स्तंभों को थोड़ा भिन्न रूप में प्रस्तुत करते हैं, जैसे —

1. परिस्थितिकी (Ecology)
2. अर्थव्यवस्था (Economy)
3. समानता या हिस्सेदारी (Equity)

कई विचारकों का यह भी मत है कि इन तीन स्तंभों को और सुदृढ़ बनाने के लिए संस्कृति (Culture), संस्थागत व्यवस्था (Institutions) या सुशासन (Governance) को चौथे स्तंभ के रूप में भी शामिल किया जा सकता है।

सतत विकास (Sustainable Development) का मूल उद्देश्य इन सभी स्तंभों के बीच संतुलन स्थापित करना है। इसका तात्पर्य यह है कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता न किया जाए। इसलिए सतत विकास की अवधारणा में आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

पर्यावरण पर बढ़ते दबाव के प्रमुख कारण

आज वैश्विक स्तर पर पर्यावरण पर कई प्रकार के दबाव बढ़ते जा रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं —

* वायु, जल और भूमि प्रदूषण
* प्राकृतिक संसाधनों का अव्यवस्थित या अत्यधिक उपयोग
* कचरा प्रबंधन की अपर्याप्त या गलत व्यवस्थाएँ
* जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
* पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का क्षरण
* जैव विविधता (Biodiversity) में कमी 
* देशों के बीच तनाव, युद्ध और सैन्य गतिविधियों से होने वाली पर्यावरणीय क्षति

वर्त्तमान स्थितियों को देखें तो हम पाते हैं कि युद्ध और देशों के बीच बढ़ते तनाव का भी पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। सैन्य गतिविधियों, बमबारी और हथियारों के प्रयोग से वायु, जल और भूमि प्रदूषण बढ़ता है तथा प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन होता है। युद्ध के कारण जंगलों, कृषि भूमि और पारिस्थितिकी तंत्र को भारी क्षति पहुँचती है, जिससे जैव विविधता भी प्रभावित होती है। इसके अतिरिक्त युद्ध के दौरान होने वाला विनाश और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव डालती है। इन चुनौतियों के कारण सरकारों, उद्योगों और समाज के सामने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसलिए शांति और सहयोग को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक माना जाता है। हमें शान्ति और सहयोग के साथ पर्यावरण के संरक्षण के लिए कदम उठाने चाहिए। 

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली की आवश्यकता

आज समाज की अपेक्षाएँ पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत विकास के प्रति पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। इसके परिणामस्वरूप विभिन्न देशों में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कानूनों और नियामकीय ढाँचों (Legal and Regulatory Frameworks) को अधिक सख्त बनाया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में संगठनों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे पर्यावरणीय मुद्दों के प्रबंधन के लिए एक संगठित और व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाएँ। पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System – EMS) ऐसा ही एक ढाँचा प्रदान करती है, जिसके माध्यम से संगठन अपने पर्यावरणीय प्रभावों की पहचान कर सकते हैं, उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं और निरंतर सुधार की दिशा में कार्य कर सकते हैं। इस प्रकार EMS को अपनाकर संगठन सततता के पर्यावरणीय स्तंभ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

ISO 14001 और पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली

ISO 14001:2015 एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जो पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली के लिए आवश्यक अपेक्षाओं (Requirements) को निर्धारित करता है।

इस मानक के माध्यम से कोई भी संगठन —

* अपने पर्यावरणीय पहलुओं की पहचान कर सकता है,
* पर्यावरणीय जोखिमों और अवसरों का प्रबंधन कर सकता है,
* पर्यावरणीय प्रदर्शन (Environmental Performance) को बेहतर बना सकता है,
* और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर सकता है।

यह उल्लेखनीय है कि ISO 14001:2015 वर्तमान में संशोधन प्रक्रिया में है। ISO/FDIS 14001:2026 का मसौदा जारी किया जा चुका है और संभावना है कि अप्रैल 2026 तक ISO 14001:2026 का अंतिम संस्करण प्रकाशित कर दिया जाए।

सादर,
केशव राम सिंघल

Wednesday, March 11, 2026

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS), इसके लाभ और ISO 14001

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS), इसके लाभ और ISO 14001

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) क्या है?


प्रबंध प्रणाली (Management System) वह संरचित तरीका है जिसके माध्यम से कोई भी संगठन अपने उद्देश्यों, प्रक्रियाओं और गतिविधियों की योजना बनाता है तथा उनका प्रबंधन करता है। पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System – EMS) संगठन की प्रबंध प्रणाली का वह भाग है जो पर्यावरणीय पहलुओं और प्रभावों के प्रबंधन से संबंधित होता है।


दूसरे शब्दों में, EMS एक ऐसा ढाँचा प्रदान करता है जिसके माध्यम से संगठन —


* अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का प्रबंधन कर सकता है,

* पर्यावरण से जुड़े जोखिमों और अवसरों को पहचान और संबोधित कर सकता है, तथा 

* सतत विकास (Sustainability) को बढ़ावा दे सकता है।


EMS का उद्देश्य संगठन के संचालन के प्रत्येक स्तर पर पर्यावरणीय सततता (Environmental Sustainability) के सिद्धांतों को योजनाबद्ध और रणनीतिक रूप से शामिल करना है।


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली लागू करने के लाभ


EMS लागू करने के बाद कोई भी संगठन —


• यह पहचान सकता है कि उसकी गतिविधियाँ पर्यावरण पर किस प्रकार प्रभाव डालती हैं,

• पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए मापनीय लक्ष्य निर्धारित कर सकता है,

• इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त प्रक्रियाएँ और नियंत्रण उपाय लागू कर सकता है,

• पर्यावरणीय प्रदर्शन की नियमित निगरानी (Monitoring) कर सकता है, और 

• अंततः निरंतर सुधार (Continual Improvement) के माध्यम से अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है।


ISO 14001 क्या है?


ISO 14001 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System – EMS) के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जिसे International Organization for Standardization (ISO) द्वारा विकसित किया गया है। यह मानक संगठनों को उनके कार्यों, उत्पादों और सेवाओं से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने, नियंत्रित करने और निरंतर सुधार करने के लिए एक व्यवस्थित ढाँचा प्रदान करता है। आज विश्व के 170 से अधिक देशों में 3,00,000 से अधिक संगठन इस मानक पर भरोसा करते हैं और इसे अपने संगठनों में लागू कर रहे हैं।


ISO 14001 संगठनों को एक व्यावहारिक (Practical) और लचीला (Flexible) फ्रेमवर्क प्रदान करता है, जिसके माध्यम से वे —


* अपने पर्यावरणीय प्रभावों को पहचान और प्रबंध कर सकते हैं,

* कानूनी एवं नियामकीय अनुपालन (Compliance) को बेहतर बना सकते हैं,

* संसाधनों के उपयोग की दक्षता बढ़ा सकते हैं,

* लागत को अनुकूल बना सकते हैं, तथा 

* संगठन की साख और विश्वसनीयता को मजबूत कर सकते हैं।


वर्तमान में लागू ISO 14001:2015 मानक संशोधन प्रक्रिया में है। जनवरी 2026 में इसका Final Draft International Standard (FDIS) जारी किया जा चुका है और संभावना है कि मार्च–अप्रैल 2026 के आसपास इसका संशोधित संस्करण ISO 14001:2026 के रूप में प्रकाशित होगा।


नया संस्करण संगठनों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी को अधिक प्रभावी ढंग से अपनाने में सहायता करेगा, चाहे संगठन का आकार या क्षेत्र कुछ भी क्यों न हो। इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि जिन संगठनों को पर्यावरणीय प्रबंध का पूर्व अनुभव नहीं है, वे भी इसे अपेक्षाकृत सरलता से समझ और लागू कर सकें।


सार 


आज के समय में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास वैश्विक प्राथमिकता बन चुके हैं। ऐसे में ISO 14001 संगठनों को यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि उनकी गतिविधियाँ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और टिकाऊ हों।


यह मानक केवल पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनों को दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता और सामाजिक विश्वास प्राप्त करने में भी सहायक सिद्ध होता है। मार्च–अप्रैल 2026 के आसपास पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली का संशोधित संस्करण ISO 14001:2026 के रूप में प्रकाशित होगा।


सादर,

केशव राम सिंघल


ISO/FDIS 14001:2026 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली मानक में प्रमुख परिवर्तन

 ISO/FDIS 14001:2026 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली मानक में प्रमुख परिवर्तन

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 


ISO/FDIS 14001:2026 पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System – EMS) का अंतिम ड्राफ्ट मानक जनवरी 2026 में जारी हो चुका है, लेकिन अभी इसे अंतिम मानक (Final Standard) के रूप में प्रकाशित नहीं किया गया है। अनुमान है कि मार्च–अप्रैल 2026 के आसपास इसका अंतिम संस्करण प्रकाशित होगा, जो ISO 14001:2015 को प्रतिस्थापित करेगा।


ISO/FDIS 14001:2026 में प्रमुख Clause-wise परिवर्तन संक्षेप में निम्नलिखित हैं —


Clause 4 – संगठन का संदर्भ (Context of the Organization)


इस क्लॉज़ में मुख्य परिवर्तन के रूप में संगठन के पर्यावरणीय संदर्भ का दायरा विस्तृत किया गया है। अब संगठन को केवल जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ही नहीं, बल्कि जैव विविधता, प्रदूषण स्तर तथा प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता (Biodiversity, Pollution Levels, Natural Resources Availability) जैसे पर्यावरणीय कारकों पर भी विचार करना होगा।


इसका अर्थ यह है कि पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली लागू करते समय संगठन को व्यापक पर्यावरणीय परिस्थितियों का विश्लेषण करना आवश्यक होगा। नए संस्करण में जलवायु परिवर्तन को EMS के संदर्भ में अधिक स्पष्ट रूप से शामिल करने पर विशेष बल दिया गया है।


Clause 5 – नेतृत्व (Leadership)


इस क्लॉज़ में पर्यावरणीय प्रदर्शन के प्रति शीर्ष नेतृत्व (Top Management) की जवाबदेही को और अधिक स्पष्ट किया गया है। पर्यावरणीय प्रशासन (Environmental Governance) और जवाबदेही (Accountability) पर विशेष जोर दिया गया है। अर्थात् अब नेतृत्व की भूमिका केवल पर्यावरणीय नीति घोषित करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पर्यावरणीय प्रदर्शन के परिणामों के प्रति भी उनकी जिम्मेदारी अधिक स्पष्ट होगी।


Clause 6 – आयोजना (Planning)


यह क्लॉज़ इस संशोधन में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों वाला भाग माना जा रहा है।


Clause 6.1 – जोखिम और अवसर (Risks and Opportunities)


इस उप-क्लॉज़ में जोखिम और अवसरों की पहचान तथा उनसे संबंधित कार्रवाइयों की अपेक्षाओं को पुनर्संरचित (Restructured) किया गया है। जोखिम और अवसरों की पहचान तथा उनके प्रबंधन के लिए कार्ययोजनाओं को अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है।


Clause 6.1.2 – पर्यावरणीय पहलू (Environmental Aspects)


इस भाग में जीवन-चक्र परिप्रेक्ष्य (Life-cycle Perspective) को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। अब उत्पाद या सेवा के पूरे जीवन-चक्र — डिज़ाइन से लेकर निपटान (Disposal) तक — के पर्यावरणीय प्रभावों पर अधिक ध्यान देने की अपेक्षा की गई है।


Clause 6.3 – परिवर्तनों की योजना बनाना और उनका प्रबंधन करना (Planning and Managing Changes)


यह इस मानक में जोड़ा गया एक नया क्लॉज़ है। इसके अंतर्गत EMS में होने वाले परिवर्तनों — जैसे प्रक्रिया, तकनीक, संगठनात्मक संरचना या विनियम (Process, Technology, Organization, Regulation) — को योजनाबद्ध तरीके से प्रबंधित और नियंत्रित करने की अपेक्षा की गई है।


Clause 7 – समर्थन (Support)


इस क्लॉज़ में क्षमता (Competence), जागरूकता (Awareness) और संचार (Communication) से संबंधित अपेक्षाओं को अधिक स्पष्ट किया गया है। साथ ही मार्गदर्शन सामग्री (Guidance Text) को भी अधिक विस्तृत बनाया गया है।


Clause 8 – संचालन (Operation)


इस क्लॉज़ में “Outsourced Processes” शब्दावली के स्थान पर “Externally Provided Processes, Products and Services” शब्दावली का प्रयोग किया गया है। इसका अर्थ यह है कि अब संगठन को अपने सप्लायर तथा वैल्यू-चेन (Value Chain) पर अधिक प्रभावी नियंत्रण या प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।


Clause 9 – प्रदर्शन मूल्यांकन (Performance Evaluation)


इस क्लॉज़ में पर्यावरणीय प्रदर्शन की निगरानी और मूल्यांकन (Environmental Performance Monitoring and Evaluation) पर अधिक जोर दिया गया है। साथ ही हितधारकों की अपेक्षाओं (Stakeholder Expectations) तथा रिपोर्टिंग (Reporting) से संबंधित अपेक्षाओं को भी अधिक स्पष्ट किया गया है।


Clause 10 – सुधार (Improvement)


इस क्लॉज़ में केवल छोटे संपादकीय परिवर्तन तथा शब्दावली (Terminology) के अद्यतन किए गए हैं।


प्रमुख परिवर्तन – संक्षेप में


- जलवायु परिवर्तन के साथ व्यापक पर्यावरणीय परिस्थितियों (Environmental Conditions) का समावेश

- नेतृत्व की जवाबदेही (Leadership Accountability) पर अधिक जोर

- जोखिम एवं अवसर प्रक्रिया (Risk and Opportunity Process) का पुनर्संरचना

- जीवन-चक्र सोच (Life-cycle Thinking) को सुदृढ़ करना

- परिवर्तन प्रबंधन (Change Management) के लिए नया क्लॉज़

- आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) तथा बाहरी रूप से प्रदान की जाने वाली प्रक्रियाओं, उत्पादों और सेवाओं पर अधिक ध्यान


निष्कर्ष


संक्षेप में कहा जा सकता है कि ISO/FDIS 14001:2026 कोई नया ढांचा प्रस्तुत नहीं करता, बल्कि मौजूदा पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) को अधिक स्पष्ट, व्यापक और पर्यावरणीय दृष्टि से मजबूत बनाने का प्रयास करता है।


यह ध्यान देने योग्य है कि यह मानक का Final Draft International Standard (FDIS) है। अंतिम प्रकाशन के समय इसमें कुछ छोटे-मोटे संपादकीय परिवर्तन संभव हैं। यह आलेख विभिन्न उपलब्ध स्रोतों से संकलित जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।


सादर

केशव राम सिंघल 


Sunday, April 17, 2016

BACKGROUND OF ENVIRONMENTAL MANAGEMENT SYSTEM



There are three pillars of sustainability that can be seen as: (i) Economic, (ii) Environmental, and (iii) Social. Some authors suggest three pillars as: (i) Ecology, (ii) Economy, and (iii) Equity, and they also expand these three pillars by including the fourth pillar as culture, institution or governance. These pillars needs to be balanced in order to achieve the goal of sustainable development. Achieving the balance between these pillars is considered necessary to meet present needs without compromising the needs of future generations.



There are growing pressure on environment from the following:
- Pollution,
- Inefficient use of resources,
- Improper waste management,
- Climate change,
- Degradation of ecosystem,
- Loss of biodiversity

More stringent rules and regulations (legal framework) are required as a societal expectations for transparency, accountability and sustainable development. All these factors have led us to adopt a systematic approach to environmental management by implementing environmental management system so that we may contribute to the environmental pillars of sustainability.

ISO 14001:2015 EMS is a standard that specifies requirements for an environmental management system. An organization can use ISO 14001:2015 EMS standard to enhance organization's environmental performance.

Best wishes,

Keshav Ram Singhal