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Keshav Ram Singhal

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बुधवार, 24 जून 2026

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) – नेतृत्व और प्रतिबद्धता (Leadership and commitment)

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) – नेतृत्व और प्रतिबद्धता (Leadership and commitment) 

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ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 5.1 की अपेक्षाओं के अनुसार उच्च प्रबंधन (Top management) को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के लिए अपना नेतृत्व और प्रतिबद्धता प्रदर्शित करना आवश्यक है। किसी भी संगठन में उच्च प्रबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वही संगठन की दिशा, प्राथमिकताएँ और संस्कृति निर्धारित करता है। संगठन के लोगों का नेतृत्व करते हुए उन्हें मार्गदर्शन देना उच्च प्रबंधन का प्रमुख दायित्व है। ISO 14001:2026 EMS मानक के अनुसार उच्च प्रबंधन के निम्न मुख्य दायित्व हैं - 


(1) उच्च प्रबंधन पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की प्रभावशीलता (Effectiveness) की समग्र जिम्मेदारी ले।


(2) उच्च प्रबंधन यह सुनिश्चित करे कि पर्यावरणीय नीति (Environmental policy) और पर्यावरण के लक्ष्य तय हों, जो संगठन की रणनीति और संदर्भ के हिसाब से तय किए गए हों। 


(3) उच्च प्रबंधन यह सुनिश्चित करे कि पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की अपेक्षाओं को संगठन की व्यावसायिक प्रक्रियाओं (Business Processes) में एकीकृत (Integrate) किया जाए। यहाँ यह ध्यान रखना जरूरी है कि व्यावसायिक (Business) का अर्थ मोटे तौर पर उन कामों से है, जो संगठन के उद्देश्य के लिए आवश्यक हैं।  


(4) उच्च प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना है कि पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के लिए ज़रूरी संसाधन (जैसे कार्मिक, मशीनें, उपकरण आदि) उपलब्ध हों। उदाहरण - यदि किसी उद्योग में अपशिष्ट जल (Wastewater) उत्पन्न होता है, तो उच्च प्रबंधन को ETP (Effluent Treatment Plant) स्थापित करने हेतु बजट और संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।


(5) उच्च प्रबंधन का यह दायित्व भी है कि वह प्रभावशाली पर्यावरण प्रबंध और पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की अपेक्षाओं को पूरा करने के महत्व के बारे में अपने कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों को जागरूक करें, जो संगठन की पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) से सम्बंधित किसी कार्य या प्रक्रिया से जुड़े हों। उदाहरण - शीर्ष प्रबंधन पर्यावरण दिवस (Environment Day) और उचित अवसरों पर कर्मचारियों को संबोधित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे सकता है।


(6) उच्च प्रबंधन यह सुनिश्चित करे कि संगठन की पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) इच्छित परिणाम प्राप्त करे। 


(7) पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार हेतु कर्मचारियों को सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित करे तथा उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान करे।


(8) उच्च प्रबंधन लगातार सुधार (Continual improvement) को बढ़ावा दे। 


(9) अन्य प्रासंगिक प्रबंधन भूमिकाओं को उनके-अपने क्षेत्रों में पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) से संबंधित जिम्मेदारियाँ निभाने हेतु समर्थन प्रदान करे।  


व्यावहारिक रूप से, उच्च प्रबंधन की भागीदारी निम्न उदाहरणों से स्पष्ट होती है - 


• शीर्ष प्रबंधन स्वयं प्रबंधन समीक्षा (Management Review) बैठकों में भाग लेकर पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के प्रदर्शन की समीक्षा करता है।


• संगठन में “No Plastic Policy” लागू कर पर्यावरणीय संस्कृति को बढ़ावा देता है।


हम कह सकते हैं कि उच्च प्रबंधन को वे सभी काम करने चाहिए जिससे वे अपने नेतृत्व को साबित कर सकें, जैसा कि उनकी ज़िम्मेदारी के क्षेत्र में लागू होता है। यदि हम ISO 14001:2026 EMS मानक की अपेक्षाओं का अध्ययन करें तो पाते हैं कि उच्च प्रबंधन के पास ख़ास जिम्मेदारी है। उच्च प्रबंधन कुछ कार्यों को अन्य व्यक्तियों को सौंप (Delegate) सकता है, लेकिन पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की समग्र जवाबदेही (Accountability) उसी की रहती है। पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental performance), अनुपालन जिम्मेदारियों (Compliance responsibilities) को पूरा करने, पर्यावरणीय लक्ष्यों को पाने और इच्छुक पक्षों का भरोसा बढ़ाने के लिए उच्च प्रबंधन को संगठन में सकारात्मक संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।  


सार रूप में, ISO 14001:2026 EMS मानक कार्यान्वयन की सफलता काफी हद तक उच्च प्रबंधन के सक्रिय नेतृत्व और वास्तविक प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है। जब नेतृत्व केवल नीतियों तक सीमित न रहकर व्यवहार में दिखाई देता है, तब ही संगठन में एक मजबूत पर्यावरणीय संस्कृति विकसित होती है और EMS प्रभावी रूप से कार्य करता है। उच्च प्रबंधन का नेतृत्व न केवल आंतरिक अनुपालन सुनिश्चित करता है, बल्कि यह बाहरी इच्छुक पक्षों (Interested Parties) के साथ विश्वास का सेतु भी बनाता है। 


सादर, 

केशव राम सिंघल


सोमवार, 22 जून 2026

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) - मानक खंड 4.4 की व्याख्या

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) - मानक खंड 4.4 की व्याख्या

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ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 4.4 के अनुसार, संगठन को अपने पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental Performance) में सुधार करते हुए, अपेक्षित परिणाम (Intended outcomes) प्राप्त करने के लिए एक पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) स्थापित करना  (Establish), कार्यान्वित करना (Implement), बनाए रखना (Maintain) और निरंतर सुधार करना (Continually Improve) आवश्यक है।इसमें आवश्यक प्रक्रियाएँ (Processes) तथा उनके परस्पर संबंध (Interactions) शामिल होने चाहिए।


ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 4.4 का मुख्य उद्देश्य संगठन के भीतर "प्रणाली (System) के ढांचे को स्थापित और कार्यान्वित करना" है। इसका मकसद निम्नलिखित तीन स्तंभों पर आधारित है - 


- समग्रता (Holistic Approach) - इस खंड की अपेक्षा यह सुनिश्चित करता है कि पर्यावरणीय प्रबंधन केवल कुछ अलग-थलग प्रक्रियाओं तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे संगठन की कार्यप्रणाली का हिस्सा बने।


- अपेक्षित परिणाम (Intended Outcomes) - इसका प्राथमिक उद्देश्य यह है कि EMS केवल कागजी कार्रवाई न बनकर, वास्तव में संगठन के पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental Performance) को बेहतर बनाने, अनुपालन (Compliance) सुनिश्चित करने और पर्यावरणीय उद्देश्यों को प्राप्त करने में सक्षम हो।


- प्रक्रियात्मक एकीकरण - इस खंड की अपेक्षा का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि संगठन को अपनी मौजूदा व्यावसायिक प्रक्रियाओं (Business Processes) का उपयोग करके EMS को लागू करे, न कि अनावश्यक रूप से जटिल नई प्रणालियां बनाने की ओर बढ़े।


प्रासंगिक जानकारी पर विचार 


संगठन में पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की स्थापना और रख-रखाव करते समय संगठन को ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 4.1 (संगठन का प्रसंग) और खंड 4.2 (इच्छुक पक्षों की अपेक्षाएँ) के अंतर्गत पहचानी गई जानकारी पर विचार करना आवश्यक है।


प्रक्रियाओं की संरचना में लचीलापन


हर संगठन जो ISO 14001:2026 EMS मानक लागू करता है, उसके पास यह स्वतंत्रता है कि वह मानक की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए एक या अधिक प्रक्रियाएँ (Processes) विकसित कर सकता है; हालांकि यह ध्यान रखना लाभप्रद रहेगा कि प्रत्येक प्रक्रिया की जिम्मेदारी (Responsibility) स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाए; और यह सुनिश्चित किया जाए कि संगठन की पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) अपेक्षित परिणाम देने में सक्षम हो।


संगठन की पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS), उसके मौजूदा व्यावसायिक प्रक्रियाओं (Business Processes) के साथ एकीकृत (Integrated) होनी चाहिए।


एकीकृत सोच (Integrated Approach) 


यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक अपेक्षा के लिए अलग-अलग प्रक्रिया बनाई जाए। उदाहारण - एक संगठन एक ही आयोजना प्रक्रिया (Planning Process) के माध्यम से जोखिमों और अवसरों (मानक के खंड 6.1), पर्यावरणीय पहलुओं (Environmental Aspects), अनुपालन दायित्वों (Compliance Obligations), और पर्यावरणीय उद्देश्यों (Environmental Objectives) सभी को संबोधित कर सकता है।


मौजूदा प्रणालियों का उपयोग (Use of Existing Systems)


संगठन अपनी अन्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं या संबंधित इकाइयों (जैसे Corporate/Group level systems) द्वारा विकसित प्रक्रियाओं और प्रलेखित जानकारी (Documented Information) का उपयोग पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए कर सकता है। उदाहरण - मानव संसाधन (HR) विभाग की प्रशिक्षण प्रक्रिया (Training process) का उपयोग EMS Competence बढ़ाने (मानक के खंड 7.2) के लिए किया जा सकता है। खरीद प्रक्रिया (Procurement process) में हरा खरीद मापदंड (Green Purchasing Criteria) जोड़कर पर्यावरणीय पहलुओं को संबोधित किया जा सकता है। रखरखाव प्रक्रिया (Maintenance process) के माध्यम से ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) और संसाधन संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकता है।


प्रसंग और इच्छुक पक्षों का एकीकरण 


संगठन को अपने प्रसंग (Context) से जुड़े मुद्दों और इच्छुक पक्षों (Interested Parties) की अपेक्षाओं को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) में समुचित रूप से शामिल करना चाहिए। उदाहरण - यदि स्थानीय समुदाय जल प्रदूषण को लेकर चिंतित है, तो संगठन की पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) में जल प्रबंधन नियंत्रण शामिल किया जाना चाहिए। यदि नियामक संस्था उत्सर्जन सीमा तय करती है, तो उसे अनुपालन दायित्व (Compliance Obligation) के रूप में शामिल किया जाना आवश्यक है। कुछ व्यावहारिक उदाहरण (Practical Examples) - निर्माण उद्योग (Manufacturing) में उत्पादन प्रक्रिया, अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा उपयोग को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) प्रक्रियाओं में शामिल करना। सेवा क्षेत्र (Service Sector) में आईटी (IT) कंपनी द्वारा डेटा सेंटर की ऊर्जा खपत और कूलिंग सिस्टम को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) में शामिल करना।निर्माण परियोजना (Construction) में धूल नियंत्रण, शोर नियंत्रण और अपशिष्ट निपटान के लिए प्रक्रियाएँ स्थापित करना।

 

सार


ISO 14001:2026 EMS मानक का खंड 4.4 संगठन को एक प्रणाली आधारित (System-based), एकीकृत (Integrated) और लचीला (Flexible) दृष्टिकोण अपनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। यदि संगठन अपनी प्रक्रियाओं को सही ढंग से परिभाषित, एकीकृत और लागू करे, तो वह न केवल ISO 14001:2026 EMS मानक की अपेक्षाओं को पूरा कर सकता है, बल्कि अपने पर्यावरणीय निष्पादन में निरंतर सुधार भी सुनिश्चित कर सकता है।

 

सादर,

केशव राम सिंघल 


शनिवार, 20 जून 2026

जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम - ISO IWA 42:2022 – Net Zero Guidelines

 जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम - ISO IWA 42:2022 – Net Zero Guidelines 

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नवंबर 2022 में ISO (International Organization for Standardization) ने IWA 42:2022 जारी किया, जिसका पूरा शीर्षक "Net Zero Guidelines" है। यह एक International Workshop Agreement (IWA) है, जो बाजार की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया। COP27 सम्मेलन में लॉन्च हुए इस दस्तावेज़ का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में Net Zero लक्ष्यों को लेकर फैले भ्रम को दूर करना और एक समान, विश्वसनीय तथा क्रियान्वयन योग्य दृष्टिकोण प्रदान करना है।


Net Zero का अर्थ है ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर तक कम करना और शेष उत्सर्जन को मानव-प्रेरित Removals (वातावरण से गैसों को हटाना) के माध्यम से संतुलित करना, ताकि कुल प्रभाव शून्य हो जाए। यह 1.5°C की वार्मिंग सीमा बनाए रखने के लिए 2050 तक (या उससे पहले) Net Zero हासिल करने में मदद करता है।


यह दस्तावेज क्यों महत्वपूर्ण है? 


आजकल कई संगठन Net Zero का दावा करते हैं, लेकिन Greenwashing (झूठे या अतिरंजित पर्यावरणीय दावे) की शिकायतें आम हैं। IWA 42:2022 इन समस्याओं का समाधान करता है। इस दस्तावेज का प्रमुख उद्देश्य है - 


- Net Zero, Emissions, Removals, Offsets आदि की स्पष्ट परिभाषाएं प्रदान करना।

- उच्च-स्तरीय सिद्धांत और व्यावहारिक मार्गदर्शन देना।

- स्वैच्छिक पहलों, नीतियों और नियमों को एकजुट करना।

- पारदर्शी रिपोर्टिंग और credible claims सुनिश्चित करना।


यह दस्तावेज़ संगठनों, शहरों, क्षेत्रों और देशों सभी स्तरों पर लागू होता है।


मुख्य सिद्धांत और सिफारिशें


IWA 42:2022 निम्नलिखित बातों पर मजबूत जोर देता है -


- Mitigation-Led Approach - सबसे पहले उत्सर्जन कम करें। Offsets/removals को अंतिम विकल्प मानें। Scope 1, 2 और 3 (value chain) सभी उत्सर्जनों को शामिल करें।

- Science-Based Targets - क्षेत्र-विशेष science-based pathways (जैसे SBTi) अपनाएं। 2030 तक महत्वाकांक्षी अंतरिम लक्ष्य निर्धारित करें।

- Leadership Commitment - शीर्ष नेतृत्व की मजबूत प्रतिबद्धता जरूरी। Net Zero को core strategy, governance और incentives में शामिल करें।

- Removals and Offsets - केवल high-quality, verifiable और long-term removals (afforestation, direct air capture, soil carbon आदि) का उपयोग करें।

- Transparency and Accountability - तीसरे पक्ष से verification, सार्वजनिक रिपोर्टिंग और risk-based approach।

- Collaboration - Value chain में सहयोग, innovation को बढ़ावा और Beyond Net Zero योगदान।


महत्वपूर्ण - Avoided emissions को अपनी reductions में गिनने की अनुमति नहीं है।


भारत के संदर्भ में प्रासंगिकता 


भारत जैसे विकासशील देश के लिए Net Zero चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसमें बड़े अवसर भी हैं - 


- ऊर्जा संक्रमण - Renewable energy बढ़ाना और Energy efficiency सुधारना।

- Scope 3 फोकस - Supply chain में SMEs को शामिल करना।

- राष्ट्रीय नीतियों से तालमेल - India’s NDC (2030 तक emission intensity 45% कम करना), LiFE Mission (सस्टेनेबल lifestyle) और Net Zero 2070 लक्ष्य के साथ align करना।

- भारतीय कंपनियां इस गाइडलाइंस को अपनाकर Global investors को आकर्षित कर सकती हैं और greenwashing के आरोपों से बच सकती हैं।


गाइडलाइंस कैसे प्राप्त करें?


ISO ने जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए यह दस्तावेज़ मुफ्त कर दिया है।


अंग्रेजी संस्करण निःशुल्क डाउनलोड करें - आधिकारिक पेज खोलने के लिए यहाँ क्लिक करें। → आधिकारिक पेज खुलने पर “Access the Guidelines” पर क्लिक करें।


यह English, French, Japanese, Russian, Spanish में उपलब्ध है। हिंदी संस्करण अभी आधिकारिक रूप से उपलब्ध नहीं है।


सार 


ISO IWA 42:2022 सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि सामूहिक कार्रवाई का ब्लूप्रिंट है। यह Net Zero claims को credible बनाता है और असली बदलाव लाने में मदद करता है।


Net Zero कल की नहीं, आज की जरूरत है — अभी की!


संगठनों, सरकार और हम सभी को इस गाइडलाइंस को अपनाकर जलवायु संकट से लड़ना चाहिए।


सादर,

केशव राम सिंघल


शुक्रवार, 19 जून 2026

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) तय करना

पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) तय करना 

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ISO 14001:2026 EMS  मानक के खंड 4.3 के अनुसार, संगठन को अपनी पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) निर्धारित करना आवश्यक है। यह कार्यक्षेत्र संगठन की EMS की सीमाओं (Boundaries) और लागू होने की उपयुक्तता (Applicability) को स्पष्ट करता है।


कार्यक्षेत्र तय करते समय विचार करने योग्य बिंदु


संगठन को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) निर्धारित करते समय निम्न पहलुओं पर विचार करना चाहिए -


a) मानक के खंड 4.1 के अनुसार बाहरी और आंतरिक मुद्दे (External and Internal Issues)

b) मानक के खंड 4.2 के अनुसार इच्छुक पक्षों की अपेक्षाएँ और अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations)

c) संगठनात्मक इकाइयाँ, कार्य और भौतिक सीमाएँ (Organizational, Functional & Physical Boundaries)

d) गतिविधियाँ, उत्पाद और सेवाएँ (Activities, Products and Services)

e) जीवन चक्र (Life Cycle) के संदर्भ में नियंत्रण और प्रभाव की क्षमता


कार्यक्षेत्र (Scope) का महत्व 


एक बार संगठन के पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) निर्धारित हो जाने के बाद उस कार्यक्षेत्र (Scope) के अंतर्गत आने वाली सभी गतिविधियाँ, उत्पाद और सेवाएँ पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) में शामिल होती हैं। पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के कार्यक्षेत्र (Scope) को प्रलेखित जानकारी (Documented Information) के रूप में बनाए रखना आवश्यक है। पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) इच्छुक पक्षों के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए


कार्यक्षेत्र कथन (Scope Statement)


ABC कंपनी का पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) 

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ABC कंपनी के सभी कार्यालय और निर्माण इकाईयाँ, जो ऑटोमोबाइल पार्ट्स के निर्माण, पैकेजिंग और वितरण से संबंधित गतिविधियों में संलग्न है, पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) में शामिल हैं। 


या 


XYZ कंपनी का पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope)

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XYZ कंपनी के जयपुर स्थित निर्माण इकाई में ऑटोमोबाइल पार्ट्स के निर्माण, पैकेजिंग और वितरण से संबंधित सभी गतिविधियाँ पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) में शामिल हैं।


कार्यक्षेत्र (Scope) की सीमाएँ 


1. आंशिक लागू (Partial Scope) - जब एक बड़ी कंपनी केवल एक प्लांट (Plant) में पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) लागू करती है। जैसे उदाहरण - “केवल पुणे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट” में। 


2. पूरे संगठन में लागू - जब पूरा संगठन पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) के अंतर्गत आता है। जैसे उदाहरण - “कम्पनी की सभी निर्माण और सेवा इकाइयाँ”। 


3. सेवा क्षेत्र (Service Sector) - जब एक IT कंपनी केवल डेटा सेंटर संचालन को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) में शामिल करती है। 


लचीलापन (Flexibility)


संगठन को यह स्वतंत्रता है कि वह चाहे तो पूरे संगठन पर पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) लागू करे या केवल चयनित इकाइयों/प्रक्रियाओं (Units/Processes) पर लागू करे। उदाहरण के लिए - एक बैंक केवल अपने मुख्य कार्यालय (Head Office) में पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) लागू कर सकता है। एक निर्माण कंपनी (Manufacturing Company) केवल कुछ चयनित इकाइयों में पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) लागू कर सकती है।  


जीवन चक्र (Life Cycle) दृष्टिकोण का प्रभाव 


कार्यक्षेत्र (Scope) तय करते समय, पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की साख (Credibility) संगठनात्मक सीमाओं के चुनाव पर निर्भर करती है। संगठन जीवन चक्र (Life cycle) के नज़रिए से गतिविधि, उत्पाद और सेवा (Activity, Product and Service) पर अपने नियंत्रण या प्रभाव की सीमा पर विचार करता है। जो संगठन के ज़रूरी कामों [जैसे संसाधनों की आवंटन (Resource allocation), निर्णय लेने (Decision making), दूसरे तरह के समर्थन (Support) के लिए दूसरे अस्तित्व (जैसे ग्लोबल या रीजनल ऑफिस)] पर निर्भर करते हैं, उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि यह रिश्ता उनके संचालन और उनके पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के कार्यक्षेत्र (Scope) पर कैसे असर डालता है। अर्थात् कार्यक्षेत्र (Scope) तय करते समय संगठन को यह देखना चाहिए कि वह किन गतिविधियों पर नियंत्रण रख सकता है और किन गतिविधियों पर केवल प्रभाव डाल सकता है। उदाहरण के लिए एक कंपनी अपने प्रदाता (Supplier) को पर्यावरण के अनुकूल कच्चा माल (Eco-friendly raw material) उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है और ग्राहक उपयोग के दौरान ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) बढ़ाने के निर्देश देती है। उदाहरण के लिए एक एयर कंडीशनर निर्माता लिख सकता है, “तापमान 24–26°C पर रखें, दरवाजे और खिड़कियाँ बंद रखें, और नियमित रूप से फ़िल्टर साफ करें।”


अन्य इकाइयों पर निर्भरता (Dependency) उदाहरण


यदि संगठन वैश्विक प्रधान कार्यालय (Global Head Office) पर निर्भर है या Shared Services (HR, Procurement) बाहर से मिलते हैं तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह EMS Scope को कैसे प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए कार्यक्षेत्र (Scope) में लिखा जा सकता है कि पर्यावरण नीति (Environment policy) वैश्विक प्रधान कार्यालय द्वारा बनाई जाती है लेकिन कार्यान्वयन स्थानीय इकाई (Local Unit) द्वारा किया जाता है। 


कार्यक्षेत्र (Scope) तय करते समय सावधानियाँ 


कार्यक्षेत्र (Scope) का उपयोग महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहलुओं को बाहर करने के लिए, अनुपालन दायित्वों से बचने के लिए या पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) को “कागजी” दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए कोई संगठन केवल कार्यालय क्षेत्र को पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) में शामिल करे और उत्पादन क्षेत्र को शामिल न करे जबकि प्रदूषण उत्पादन क्षेत्र से हो रहा हो। इस सम्बन्ध में सही दृष्टिकोण यह है कि सभी महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव वाली इकाईयाँ और कार्य शामिल हों। 


विश्वसनीयता (Credibility)


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की साख (Credibility) इस पर निर्भर करती है कि पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) वास्तविक (Realistic) हो, पूर्ण (Complete) हो और भ्रामक (Misleading) न हो। 


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) की उपलब्धता इच्छुक पक्षों को (Availability to Interested Parties)


जब संगठन ISO 14001:2026 EMS मानक की पालना करने का दावा करता है तो उसे पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) कार्यक्षेत्र (Scope) को इच्छुक पक्षों के लिए उपलब्ध कराना आवश्यक है। उदाहरण के लिए संगठन इसे अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर सकता है, संगठन प्रोफाइल/विवरणिका में शामिल कर सकता है। 


सार 


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) का कार्यक्षेत्र (Scope) निर्धारित करना ISO 14001:2026 EMS  का एक महत्वपूर्ण चरण है। एक स्पष्ट और उचित कार्यक्षेत्र (Scope) पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) की प्रभावशीलता सुनिश्चित करता है, संगठन की विश्वसनीयता बढ़ाता है और अनुपालन तथा पर्यावरणीय प्रदर्शन सुधार में सहायक होता है। 


सादर,

केशव राम सिंघल 


गुरुवार, 18 जून 2026

इच्छुक पक्षों (Interested Parties) की ज़रूरतों और उम्मीदों को समझना

इच्छुक पक्षों (Interested Parties) की ज़रूरतों और उम्मीदों को समझना

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ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 4.2 के अनुसार, संगठन को निम्न निर्धारित करना आवश्यक है -


a) ऐसे इच्छुक पक्ष (Interested Parties) जो पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के लिए प्रासंगिक हैं;

b) इन इच्छुक पक्षों की ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and Expectations);

c) इनमें से कौन-सी ज़रूरतें और उम्मीदें संगठन का अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations) बनती हैं (संदर्भ: खंड 6.1.3)।


इच्छुक पक्ष कौन हो सकते हैं?


संगठन के इच्छुक पक्ष आंतरिक और बाह्य दोनों हो सकते हैं, जैसे -


* कर्मचारी (Employees)

* ग्राहक (Customers)

* आपूर्तिकर्ता (Suppliers)

* नियामक संस्थाएँ (Regulatory Authorities)

* स्थानीय समुदाय (Local Community)

* निवेशक (Investors)

* गैर-सरकारी संगठन (NGOs)

* सरकार एवं न्यायालय (Government & Courts) 


ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and Expectations)


इच्छुक पक्षों की ज़रूरतें और उम्मीदें पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती हैं, जैसे प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करना, प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग (जैसे पानी का दुरूपयोग रोकना), ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG Emissions) में कमी, जैव विविधता (Biodiversity) की सुरक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य (Ecosystem Health) बनाए रखना। 


अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations) क्या हैं? 


* कानूनी दायित्व (Laws, Regulations, Permits, Licenses)

* अन्य स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएँ (Voluntary Commitments) 


उदाहरण - 


  * ग्राहक की पर्यावरणीय अपेक्षाएँ 

  * उद्योग मानक (Industry Codes)

  * पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक (Environmental , Social and Governance - ESG)

  * स्थिरता प्रतिबद्धता (Sustainability commitments)


यहाँ महत्वपूर्ण बात यह है कि जब संगठन किसी अपेक्षा को अपनाने का निर्णय लेता है, तो वह उसके लिए अनुपालन दायित्व (Compliance obligation) बन जाती है।


व्यावहारिक उदाहरण (Practical Examples) 


1. नियामक अपेक्षा - सरकार द्वारा निर्धारित उत्सर्जन सीमा का पालन करना। यह कानूनी अनुपालन दायित्व है। 

2. ग्राहक अपेक्षा - केवल Eco-friendly packaging का उपयोग, जैसे ग्राहक कहता है कि उसे उत्पाद प्लास्टिक की पैकिंग में नहीं दिया जाए। यदि संगठन स्वीकार करता है  तो यह उसके लिए अनुपालन दायित्व है। 

3. समुदाय अपेक्षा - शोर (Noise) और धूल (Dust) कम करना। यह सामाजिक दायित्व है, जिसे अपनाने पर यह EMS में शामिल होकर अनुपालन दायित्व बन जाता है। 

4. निवेशक अपेक्षा - Sustainability रिपोर्ट प्रकाशित करना। ESG प्रतिबद्धता अपनाने पर यह अनुपालन दायित्व बन जाता है। 

5. स्वैच्छिक पहल (Voluntary Initiative) - संगठन द्वारा Carbon neutrality लक्ष्य घोषित करना। घोषित करने पर यह अनुपालन दायित्व बन जाता है। 


महत्वपूर्ण स्पष्टता 


यहॉं यह समझना आवश्यक है कि सभी ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and expectations) “अनिवार्य” नहीं होतीं। संगठन को यह निर्णय लेना होता है कि कौन-सी ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and expectations) अपनानी हैं और कौन-सी EMS में शामिल करनी हैं। 


निर्णय लेने की प्रक्रिया 


संगठन को चाहिए कि वह प्रासंगिक इच्छुक पक्षों की पहचान करे, उनकी जरूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) का विश्लेषण करे, जोखिमों और अवसरों (Risks and Opportunities) का आकलन करे और यह तय करे कि किन ज़रूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) को अपनाना है। इस कार्य के लिए संगठन में एक टास्क फ़ोर्स का गठन करना उपयोगी हो सकता है। 


पर्यावरणीय संदर्भ से जुड़ाव 


इच्छुक पक्षों की अपेक्षाएँ अक्सर पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ी होती हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन (Climate Change), संसाधनों की कमी (Resource Scarcity), प्रदूषण स्तर (Pollution Levels), जैव विविधता ह्रास (Loss of Biodiversity)। इनका सही विश्लेषण संगठन को बेहतर EMS योजना बनाने में मदद करता है।


EMS के साथ संबंध 


* खंड 4.2 → जरूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) की पहचान

* खंड 6.1.1 → इन अपेक्षाओं से जुड़े जोखिमों और अवसरों (Risks and Opportunities) का निर्धारण 

* खंड 6.1.3 → अनुपालन दायित्व निर्धारण (Compliance Obligations)

* खंड 4.4 → इन सभी को EMS में एकीकृत करना और लागू करना 


सार 


इच्छुक पक्षों की जरूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) को समझना ISO 14001 EMS का एक महत्वपूर्ण आधार है। यदि संगठन इन अपेक्षाओं का सही विश्लेषण करता है और उचित रूप से उन्हें अपनाता है, तो वह बेहतर अनुपालन सुनिश्चित कर सकता है, जोखिमों को कम कर सकता है और अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन में निरंतर सुधार कर सकता है। 


सादर, 

केशव राम सिंघल 


मंगलवार, 16 जून 2026

संगठन और उसके प्रसंग को समझना (Understanding the organization and its context)

संगठन और उसके प्रसंग को समझना (Understanding the organization and its context) 

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ISO 14001:2026 EMS मानक खंड 4.1 की अपेक्षाओं के अनुसार, संगठन को उन सभी आंतरिक (Internal) और बाह्य (External) मुद्दों का निर्धारण करना आवश्यक है, जो उसके उद्देश्य (Purpose) के लिए प्रासंगिक हैं और उसकी पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के अपेक्षित परिणामों को प्राप्त करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।


इन मुद्दों में वे पर्यावरणीय परिस्थितियाँ (Environmental Conditions) भी शामिल होती हैं, जो संगठन को प्रभावित करती हैं या संगठन द्वारा प्रभावित हो सकती हैं, जैसे प्रदूषण का स्तर, प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता (Biodiversity) तथा पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य (Ecosystem Health)। इस अपेक्षा का उद्देश्य संगठन को उन प्रमुख मुद्दों की समग्र समझ प्रदान करना है, जो उसके संचालन (Operations) को प्रभावित करते हैं, उसकी पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रबंधन को प्रभावित करते हैं, तथा EMS के अपेक्षित परिणामों पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।


आंतरिक और बाह्य मुद्दों के कुछ उदाहरण


(A) पर्यावरणीय परिस्थितियाँ


* वायु और जल की गुणवत्ता (Air and Water Quality)

* भूमि उपयोग (Land Use)

* मौजूदा प्रदूषण स्तर 

* प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता

* जैव विविधता की स्थिति

* पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य


उदाहरण - यदि कोई उद्योग जल-आधारित उत्पादन करता है, तो स्थानीय जल की उपलब्धता और गुणवत्ता उसके लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगी।


(B) बाह्य मुद्दे (External Issues)


* सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियाँ

* राजनीतिक और कानूनी ढाँचा

* नियामक (Regulatory) अपेक्षाएँ

* आर्थिक और तकनीकी विकास

* प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण


उदाहरण - सरकार द्वारा लागू नई पर्यावरणीय नियमावली या कानून संगठन की अनुपालन रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।


(C) आंतरिक मुद्दे (Internal Issues)


* संगठन की गतिविधियाँ, उत्पाद और सेवाएँ (Organization's activities, products and services)

* पर्यावरणीय निष्पादन (Environmental Performance)

* रणनीतिक दिशा (Strategic Direction)

* संगठनात्मक संस्कृति (Organizational Culture)

* क्षमताएँ (Knowledge, Processes, Systems)


उदाहरण - यदि संगठन में पर्यावरणीय जागरूकता कम है, तो EMS का कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में जागरूकता बढ़ाने के लिए उचित कदम उठाना आवश्यक है।


पर्यावरणीय परिस्थितियों की प्रकृति


यहॉं ध्यान देने की बात है कि पर्यावरणीय परिस्थितियाँ स्थानीय, क्षेत्रीय या वैश्विक (Local, Regional or Global) हो सकती हैं, अचानक (Sudden) या धीरे-धीरे (Gradual) बदल सकती हैं, तथा एक-दूसरे से परस्पर जुड़ी होती हैं।


उदाहरण - जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जल संसाधनों, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ प्रभावित करता है। इसलिए, इन परस्पर संबंधों (Interrelationships) को समझना प्रभावी पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।


पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और उसका महत्व


पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) जीवित और निर्जीव तत्वों का एक परस्पर जुड़ा हुआ तंत्र है, जिसमें शामिल होते हैं पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव (Microorganisms), जल, मिट्टी और वायु। उदाहरण - जंगल, झील, मैंग्रोव, घास के मैदान, रेगिस्तान आदि।


पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य (Ecosystem Health) का अर्थ है पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना (Structure), कार्य क्षमता (Functionality) और लचीलापन (Resilience) बनाए रखने की क्षमता। संगठन पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर निर्भर भी होते हैं, और अपनी गतिविधियों से उन्हें प्रभावित भी करते हैं।


पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के साथ संबंध


संगठन के प्रसंग की समझ का उपयोग पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) को स्थापित (Establish) करने, कार्यान्वित (Implement) करने, बनाए रखने (Maintain) तथा निरंतर सुधार (Continual Improve) करने में किया जाता है।


ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 4.1 के अनुसार पहचाने गए मुद्दे संगठन के लिए जोखिम (Risks) और अवसर (Opportunities) उत्पन्न करते हैं, जिन्हें संगठन को आयोजना (Clause 6), सहयोग व संचालन (Clause 7, 8) तथा निष्पादन मूल्यांकन (Clause 9) के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना होता है।


बाहरी और अंदरूनी मुद्दों के निर्धारण की प्रक्रिया (Process for Determination) यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ISO 14001:2026 EMS मानक बाहरी और अंदरूनी मुद्दों का पता लगाने के तरीके के बारे में कोई विशिष्ट पद्धति या मार्गदर्शन नहीं देता है। यह संगठन पर निर्भर करता है कि वह अपनी प्रकृति और आकार के अनुकूल कोई भी उपयुक्त तरीका या प्रक्रिया अपनाए। व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए, इस प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल हो सकते हैं - - टीम का गठन (Team Formation) - संगठन के शीर्ष प्रबंधन (Top Management/Leadership) को ऐसे योग्य लोगों की एक क्रॉस-फंक्शनल टीम बनानी चाहिए, जो संगठन के संचालन, उसकी प्रक्रियाओं और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की अच्छी समझ रखते हों। - विचार-मंथन (Brainstorming) - टीम के सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से और सामूहिक रूप से मंथन करना चाहिए ताकि उन प्रासंगिक मुद्दों की पहचान की जा सके जो संगठन के रणनीतिक उद्देश्यों और EMS को प्रभावित कर सकते हैं। - मुद्दों का संकलन (Compilation and Listing) - पहचाने गए सभी मुद्दों को एक स्थान पर संकलित किया जाना चाहिए। टीम को उनके महत्व और प्रभाव के विवरण के साथ इन मुद्दों की एक औपचारिक सूची (Register/List) तैयार करनी चाहिए। - निगरानी और समीक्षा (Monitoring and Review) - बदलते परिवेश के साथ ये मुद्दे भी बदल सकते हैं, इसलिए टीम को एक निश्चित समयांतराल पर इन मुद्दों पर नज़र रखनी चाहिए और नियमित रूप से उनकी समीक्षा करनी चाहिए।


संबंधित मानकों का संदर्भ (मार्गदर्शन हेतु)


पर्यावरणीय परिस्थितियों को बेहतर समझ के लिए निम्न मानकों को संदर्भ रूप में मार्गदर्शन के लिए देखा जा सकता है, पर यह ISO 14001:2026 EMS मानक की अपेक्षा (Requirement) नहीं है -


* ISO 14002-1:2019 — Environmental management systems — Guidelines for using ISO 14001 to address environmental aspects and conditions within an environmental topic area — Part 1: General

* ISO 14055-1:2017 — Environmental management — Guidelines for establishing good practices for combating land degradation and desertification — Part 1: Good practices framework 

* ISO 14080:2018 — Greenhouse gas management and related activities — Framework and principles for methodologies on climate actions  

* ISO 14090:2019 — Adaptation to climate change — Principles, requirements and guidelines  

* ISO 14091:2021 — Adaptation to climate change — Guidelines on vulnerability, impacts and risk assessment  

* ISO 17298:2025 — Biodiversity — Considering biodiversity in the strategy and operations of organizations — Requirements and guidelines 

* ISO 59014:2024 — Circular economy — Sustainability and traceability of secondary materials — Requirements and guidance 


मानकों की यह सूची देते समय ध्यान रखा गया है कि नवीनतम मानक ही लिखा जाए, फिर भी कोई गलती हो जाने या भविष्य में किसी मानक के संशोधित होने पर नवीनतम मानक ही सन्दर्भ के लिए देखा जाना चाहिए। 


मुख्य बिंदु (Quick Takeaways)


* अनिवार्य अपेक्षा - आंतरिक और बाह्य मुद्दों का निर्धारण (Clause 4.1) EMS प्रणाली की सफलता के लिए अनिवार्य है।

* परस्पर जुड़ाव - जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य स्थानीय और वैश्विक स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हैं।

* मार्गदर्शन (गैर-अनिवार्य) - ISO 14002, 17298 और 59014 जैसे मानक प्रसंग को समझने में सहायक हैं, लेकिन ऑडिट के लिए अनिवार्य आवश्यकता नहीं हैं।


सार


संगठन और उसके प्रसंग को समझना ISO 14001:2026 EMS मानक का एक मूलभूत आधार है। यदि संगठन अपने आंतरिक और बाह्य मुद्दों तथा पर्यावरणीय परिस्थितियों को सही तरीके से समझता है, तो वह बेहतर निर्णय ले सकता है, जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन कर सकता है, तथा अपने पर्यावरणीय निष्पादन में निरंतर सुधार कर सकता है।


सादर, 

केशव राम सिंघल