पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली की पृष्ठभूमि (Background of Environmental Management System)
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सततता (Sustainability) के सामान्यतः तीन प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं, जिन्हें इस प्रकार कहा जा सकता है —
1. आर्थिक (Economic)
2. पर्यावरणीय (Environmental)
3. सामाजिक (Social)
कुछ विद्वान इन तीन स्तंभों को थोड़ा भिन्न रूप में प्रस्तुत करते हैं, जैसे —
1. परिस्थितिकी (Ecology)
2. अर्थव्यवस्था (Economy)
3. समानता या हिस्सेदारी (Equity)
कई विचारकों का यह भी मत है कि इन तीन स्तंभों को और सुदृढ़ बनाने के लिए संस्कृति (Culture), संस्थागत व्यवस्था (Institutions) या सुशासन (Governance) को चौथे स्तंभ के रूप में भी शामिल किया जा सकता है।
सतत विकास (Sustainable Development) का मूल उद्देश्य इन सभी स्तंभों के बीच संतुलन स्थापित करना है। इसका तात्पर्य यह है कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता न किया जाए। इसलिए सतत विकास की अवधारणा में आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
पर्यावरण पर बढ़ते दबाव के प्रमुख कारण
आज वैश्विक स्तर पर पर्यावरण पर कई प्रकार के दबाव बढ़ते जा रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं —
* वायु, जल और भूमि प्रदूषण
* प्राकृतिक संसाधनों का अव्यवस्थित या अत्यधिक उपयोग
* कचरा प्रबंधन की अपर्याप्त या गलत व्यवस्थाएँ
* जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
* पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का क्षरण
* जैव विविधता (Biodiversity) में कमी
* देशों के बीच तनाव, युद्ध और सैन्य गतिविधियों से होने वाली पर्यावरणीय क्षति
वर्त्तमान स्थितियों को देखें तो हम पाते हैं कि युद्ध और देशों के बीच बढ़ते तनाव का भी पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। सैन्य गतिविधियों, बमबारी और हथियारों के प्रयोग से वायु, जल और भूमि प्रदूषण बढ़ता है तथा प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन होता है। युद्ध के कारण जंगलों, कृषि भूमि और पारिस्थितिकी तंत्र को भारी क्षति पहुँचती है, जिससे जैव विविधता भी प्रभावित होती है। इसके अतिरिक्त युद्ध के दौरान होने वाला विनाश और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव डालती है। इन चुनौतियों के कारण सरकारों, उद्योगों और समाज के सामने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसलिए शांति और सहयोग को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक माना जाता है। हमें शान्ति और सहयोग के साथ पर्यावरण के संरक्षण के लिए कदम उठाने चाहिए।
पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली की आवश्यकता
आज समाज की अपेक्षाएँ पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत विकास के प्रति पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। इसके परिणामस्वरूप विभिन्न देशों में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कानूनों और नियामकीय ढाँचों (Legal and Regulatory Frameworks) को अधिक सख्त बनाया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में संगठनों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे पर्यावरणीय मुद्दों के प्रबंधन के लिए एक संगठित और व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाएँ। पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System – EMS) ऐसा ही एक ढाँचा प्रदान करती है, जिसके माध्यम से संगठन अपने पर्यावरणीय प्रभावों की पहचान कर सकते हैं, उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं और निरंतर सुधार की दिशा में कार्य कर सकते हैं। इस प्रकार EMS को अपनाकर संगठन सततता के पर्यावरणीय स्तंभ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
ISO 14001 और पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली
ISO 14001:2015 एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, जो पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली के लिए आवश्यक अपेक्षाओं (Requirements) को निर्धारित करता है।
इस मानक के माध्यम से कोई भी संगठन —
* अपने पर्यावरणीय पहलुओं की पहचान कर सकता है,
* पर्यावरणीय जोखिमों और अवसरों का प्रबंधन कर सकता है,
* पर्यावरणीय प्रदर्शन (Environmental Performance) को बेहतर बना सकता है,
* और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर सकता है।
यह उल्लेखनीय है कि ISO 14001:2015 वर्तमान में संशोधन प्रक्रिया में है। ISO/FDIS 14001:2026 का मसौदा जारी किया जा चुका है और संभावना है कि अप्रैल 2026 तक ISO 14001:2026 का अंतिम संस्करण प्रकाशित कर दिया जाए।
सादर,
केशव राम सिंघल
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