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Keshav Ram Singhal

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गुरुवार, 18 जून 2026

इच्छुक पक्षों (Interested Parties) की ज़रूरतों और उम्मीदों को समझना

इच्छुक पक्षों (Interested Parties) की ज़रूरतों और उम्मीदों को समझना

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ISO 14001:2026 EMS मानक के खंड 4.2 के अनुसार, संगठन को निम्न निर्धारित करना आवश्यक है -


a) ऐसे इच्छुक पक्ष (Interested Parties) जो पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (EMS) के लिए प्रासंगिक हैं;

b) इन इच्छुक पक्षों की ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and Expectations);

c) इनमें से कौन-सी ज़रूरतें और उम्मीदें संगठन का अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations) बनती हैं (संदर्भ: खंड 6.1.3)।


इच्छुक पक्ष कौन हो सकते हैं?


संगठन के इच्छुक पक्ष आंतरिक और बाह्य दोनों हो सकते हैं, जैसे -


* कर्मचारी (Employees)

* ग्राहक (Customers)

* आपूर्तिकर्ता (Suppliers)

* नियामक संस्थाएँ (Regulatory Authorities)

* स्थानीय समुदाय (Local Community)

* निवेशक (Investors)

* गैर-सरकारी संगठन (NGOs)

* सरकार एवं न्यायालय (Government & Courts) 


ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and Expectations)


इच्छुक पक्षों की ज़रूरतें और उम्मीदें पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती हैं, जैसे प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करना, प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग (जैसे पानी का दुरूपयोग रोकना), ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG Emissions) में कमी, जैव विविधता (Biodiversity) की सुरक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य (Ecosystem Health) बनाए रखना। 


अनुपालन दायित्व (Compliance Obligations) क्या हैं? 


* कानूनी दायित्व (Laws, Regulations, Permits, Licenses)

* अन्य स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएँ (Voluntary Commitments) 


उदाहरण - 


  * ग्राहक की पर्यावरणीय अपेक्षाएँ 

  * उद्योग मानक (Industry Codes)

  * पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक (Environmental , Social and Governance - ESG)

  * स्थिरता प्रतिबद्धता (Sustainability commitments)


यहाँ महत्वपूर्ण बात यह है कि जब संगठन किसी अपेक्षा को अपनाने का निर्णय लेता है, तो वह उसके लिए अनुपालन दायित्व (Compliance obligation) बन जाती है।


व्यावहारिक उदाहरण (Practical Examples) 


1. नियामक अपेक्षा - सरकार द्वारा निर्धारित उत्सर्जन सीमा का पालन करना। यह कानूनी अनुपालन दायित्व है। 

2. ग्राहक अपेक्षा - केवल Eco-friendly packaging का उपयोग, जैसे ग्राहक कहता है कि उसे उत्पाद प्लास्टिक की पैकिंग में नहीं दिया जाए। यदि संगठन स्वीकार करता है  तो यह उसके लिए अनुपालन दायित्व है। 

3. समुदाय अपेक्षा - शोर (Noise) और धूल (Dust) कम करना। यह सामाजिक दायित्व है, जिसे अपनाने पर यह EMS में शामिल होकर अनुपालन दायित्व बन जाता है। 

4. निवेशक अपेक्षा - Sustainability रिपोर्ट प्रकाशित करना। ESG प्रतिबद्धता अपनाने पर यह अनुपालन दायित्व बन जाता है। 

5. स्वैच्छिक पहल (Voluntary Initiative) - संगठन द्वारा Carbon neutrality लक्ष्य घोषित करना। घोषित करने पर यह अनुपालन दायित्व बन जाता है। 


महत्वपूर्ण स्पष्टता 


यहॉं यह समझना आवश्यक है कि सभी ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and expectations) “अनिवार्य” नहीं होतीं। संगठन को यह निर्णय लेना होता है कि कौन-सी ज़रूरतें और उम्मीदें (Needs and expectations) अपनानी हैं और कौन-सी EMS में शामिल करनी हैं। 


निर्णय लेने की प्रक्रिया 


संगठन को चाहिए कि वह प्रासंगिक इच्छुक पक्षों की पहचान करे, उनकी जरूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) का विश्लेषण करे, जोखिमों और अवसरों (Risks and Opportunities) का आकलन करे और यह तय करे कि किन ज़रूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) को अपनाना है। इस कार्य के लिए संगठन में एक टास्क फ़ोर्स का गठन करना उपयोगी हो सकता है। 


पर्यावरणीय संदर्भ से जुड़ाव 


इच्छुक पक्षों की अपेक्षाएँ अक्सर पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ी होती हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन (Climate Change), संसाधनों की कमी (Resource Scarcity), प्रदूषण स्तर (Pollution Levels), जैव विविधता ह्रास (Loss of Biodiversity)। इनका सही विश्लेषण संगठन को बेहतर EMS योजना बनाने में मदद करता है।


EMS के साथ संबंध 


* खंड 4.2 → जरूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) की पहचान

* खंड 6.1.1 → इन अपेक्षाओं से जुड़े जोखिमों और अवसरों (Risks and Opportunities) का निर्धारण 

* खंड 6.1.3 → अनुपालन दायित्व निर्धारण (Compliance Obligations)

* खंड 4.4 → इन सभी को EMS में एकीकृत करना और लागू करना 


सार 


इच्छुक पक्षों की जरूरतों और उम्मीदों (Needs and expectations) को समझना ISO 14001 EMS का एक महत्वपूर्ण आधार है। यदि संगठन इन अपेक्षाओं का सही विश्लेषण करता है और उचित रूप से उन्हें अपनाता है, तो वह बेहतर अनुपालन सुनिश्चित कर सकता है, जोखिमों को कम कर सकता है और अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन में निरंतर सुधार कर सकता है। 


सादर, 

केशव राम सिंघल 


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